लोकतंत्र के चौथे, पांचवें और जितने भी अदृश्य स्तंभ बचे हैं, उन सभी के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। हमारे देश के पूर्व अंतरिम सीबीआई निदेशक, एम नागेश्वर राव साहब ने आखिरकार वह कदम उठा ही लिया है, जिसके लिए हर ‘निष्पक्ष’ सेवानिवृत्त सरकारी बाबू का दिल धड़कता है। जी हां, उन्होंने राजनीति के दलदल… क्षमा करें, राजनीति के पावन सरोवर में डुबकी लगा ली है। वह भी किसी ऐरी-गैरी पार्टी में नहीं, सीधे ‘सर्वजन सनातन पार्टी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर!
तोते के पिंजरे से सीधे राजनीति के अखाड़े तक
सुप्रीम कोर्ट ने कभी सीबीआई को ‘पिंजरे का तोता’ कहा था। अब लगता है कि उस तोते को पुराना पिंजरा छोटा लगने लगा था, इसलिए राव साहब ने सीधे ‘सनातन’ के विशाल आकाश में उड़ान भरने का फैसला किया है। वैसे भी, जो शख्स सालों तक सरकारी फाइलों में छिपे ‘सच’ को ढूंढता रहा हो, उसके लिए राजनीति में आकर ‘धर्म’ की रक्षा करना बाएं हाथ का खेल है। आखिर जांच एजेंसी चलाने और राजनीतिक दल चलाने में फर्क ही क्या है? दोनों ही जगह विरोधियों पर पैनी नजर रखनी होती है और सही वक्त पर ‘फाइलें’ खोलनी होती हैं।
‘जांच’ से ‘भाषण’ तक का स्वर्णिम सफर
सर्वजन सनातन पार्टी का अध्यक्ष बनना कोई मामूली बात नहीं है। अब नागेश्वर राव साहब केवल भ्रष्टाचार की जांच नहीं करेंगे, बल्कि समाज की ‘आत्मा’ को शुद्ध करेंगे। काक-वाणी के गुप्त सूत्रों का कहना है कि राव साहब ने राजनीति में आकर उन सभी नेताओं को बहुत बड़ी राहत दी है, जो पहले उनके नाम से ही कांप उठते थे। अब वे नेता आराम से कह सकते हैं, “अरे राव साहब, आप भी आखिरकार इसी लाइन में आ गए? पहले बता देते, तो हम जांच के वक्त ही चुनावी गठबंधन की बात कर लेते!”
सेवानिवृत्ति के बाद का असली ‘पुनर्वास’
भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए राजनीति अब ‘पोस्ट-रिटायरमेंट’ का सबसे लोकप्रिय और मलाईदार पैकेज बन चुकी है। कोई राज्यपाल बनता है, तो कोई सीधा पार्टी अध्यक्ष। राव साहब ने भी साबित कर दिया कि खाकी वर्दी उतारने के बाद असली देशसेवा तो केवल खादी पहनकर ही की जा सकती है। अब देखना यह है कि सीबीआई की ‘चार्जशीट’ लिखने में माहिर राव साहब, अपनी पार्टी का ‘घोषणापत्र’ कितनी कानूनी बारीकी से लिखते हैं।
काक-वाणी राव साहब के इस नए ‘मिशन’ पर अपनी पैनी नजर रखे हुए है। भगवान न करे कि उनकी इस नई पार्टी को कभी किसी जांच एजेंसी का सामना करना पड़े, क्योंकि गुरु… खुद की बनाई फाइलों का सामना करना बड़ा दर्दनाक होता है!
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