दिल्ली पुलिस का ‘हिट’ मिशन: ‘कॉकरोच आंदोलन’ के क्रांतिकारियों पर गिरी कानूनी गाज!

वाह! क्या महान दौर आ गया है। अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया को भी भारत के लोकतंत्र और उसकी अनोखी जीव-जंतु राजनीति की चिंता सताने लगी है। टोक्यो में बैठे ‘द जापान टाइम्स’ को अचानक खबर मिली कि भारत के ‘कॉकरोच आंदोलन’ के कई जांबाज सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने रैली करने से पहले ही धर दबोचा। जी हां, वही कॉकरोच जिन्हें देखकर आम जनता रसोई में चप्पल उठा लेती है, अब वे देश में क्रांति की अलख जगाने निकले थे!

परमाणु हमले से बचने वाले, पुलिस के ‘स्प्रे’ से ढेर!

विज्ञान हमेशा से यह दावा करता आया है कि अगर दुनिया पर परमाणु हमला भी हो जाए, तो सिर्फ कॉकरोच ही जिंदा बचेंगे। लेकिन बेचारों को क्या पता था कि भारत की दिल्ली पुलिस के पास परमाणु बम से भी अधिक घातक ‘कानूनी धारा-144’ और ‘पुलिसिया पेस्ट कंट्रोल’ है! बेचारों ने सोचा था कि नाले की सीवर लाइनों से निकलकर सीधे जंतर-मंतर पर लोकतंत्र का झंडा गाड़ेंगे, लेकिन पुलिस ने धारा 144 की झाड़ू से बुहारकर उन्हें सलाखों के पीछे बंद कर दिया।

काक-वाणी के गुप्त सूत्रों से पता चला है कि इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य यह साबित करना था कि बिना रीढ़ की हड्डी के भी राजनीति में सालों-साल कैसे टिका जाता है। वैसे भी, सत्ता की मार खाकर भी बार-बार जिंदा हो जाने की कला में कॉकरोच से बड़ा उस्ताद और कौन हो सकता है?

रसोई से संसद तक का क्रांतिकारी सफर

अब आप पूछेंगे कि इस आंदोलन का नाम ‘कॉकरोच’ क्यों रखा गया? सीधी सी बात है—जैसे आप रसोई में कॉकरोच को कितना भी कुचलने की कोशिश करें, वह थोड़ी देर बाद फिर से अपनी मूंछें हिलाता हुआ खड़ा हो जाता है, ठीक वैसे ही हमारे देश का विपक्ष और कार्यकर्ता हैं। हर चुनाव में जमानत जब्त होती है, लेकिन अगले चुनाव में फिर नया मंच सजाकर आ जाते हैं!

पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए इन कॉकरोच कार्यकर्ताओं के पास से कोई हथियार नहीं मिला, बस कुछ बासी ब्रेड के टुकड़े और पेस्ट कंट्रोल कंपनियों के खिलाफ लिखे गए भड़काऊ पर्चे बरामद हुए हैं। सरकार को अंदेशा था कि अगर ये राजधानी की सड़कों पर फैल गए, तो कहीं पूरी व्यवस्था में ही ‘कीड़े’ न निकाल दें।

लोकतंत्र का नया ‘पेस्ट कंट्रोल’

काक-वाणी की ओर से आम जनता को सख्त हिदायत है कि अगली बार अगर आपकी रसोई में कोई कॉकरोच दिखे, तो उसे बेगॉन छिड़ककर मारने की गलती बिल्कुल न करें। क्या पता वह किसी नई क्रांति का राष्ट्रीय अध्यक्ष हो और दिल्ली रैली की तैयारी कर रहा हो!

फिलहाल तो प्रशासन को यही सलाह है कि जेलों में थोड़ा ‘लाल हिट’ छिड़ककर रखें, वरना हिरासत में लिए गए ये क्रांतिकारी जेल की दीवारों के छेदों से निकलकर फिर से कोई नया आंदोलन न खड़ा कर दें।


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कागा जी