Title: दोस्ती का सच
आशु और विवेक दो सहयोगियों थे। वे दोनों एक ही कार्यालय में काम करते थे। वे एक दूसरे की सहायता करते एवं एक दूसरे की केवल नाकारात्मक बातों से भी डरते थे। वे एक साथ और एक दूसरे के साथ सहयोग करने से बहुत खुश रहते थे।
फिर लगभग एक साल बाद एक दिन, एक नई लड़की फिरोज़ाबाद से ऑफिस में दर्ज हुई। वह कार्यालय में कम दिन गुजारते ही सभी उसके बारे में बहुत प्रशंसाओं में से एक था। आशु ने हमेशा अपने उद्धेश्यों तक पहुंचने के लिए तत्पर होने के लिए अपनी समस्याओं और विवेक के साथ बातचीत की और अब कह रहा था कि फिर से वह जैसा कि वह होना चाहता था, इस समस्या का समाधान नहीं मिल सकता था। विवेक समझाए कि जीवन में कोई अच्छा दोस्त बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिसे आप सच में भरोसा कर सकते हैं। उसने आशु को सलाह दी कि उस लड़की से एक बार मुलाकात किए जाने की कोशिश की जा सकती है।
आशु को इस सुझाव से थोड़ा असहमति थी लेकिन वह भी जानता था कि उसे कुछ करना चाहिए। उसने विवेक के साथ एक शाम में जश्न मनाया। वह बहुत खुश थे क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में कुछ सामान्य करने का निर्णय लिया था।
अगले दिन कार्यालय में, जब आशु ने उस लड़की के साथ मुलाकात की, वह एक स्मार्ट, आत्मविश्वासी और सुंदर थी। आशु ने उसके साथ बातचीत की और एक दूसरे के जीवन के बारे में बात की। वे दोनों आगे जाकर अच्छे दोस्त बने। धीरे-धीरे वे एक दूसरे के जीवन के बारे में अधिक जानने लगे।
दिन-प्रतिदिन दोनों अधिक निकटता करने लगे और उस लड़की ने एक दिन आशु और विवेक को उनके घर पर महज चाय पर बुलाया। दोनों दोस्त ने इस दावे को स्वीकार करने की प्रतीक्षा नहीं की। इस तरह एक दिन वे दो दोस्त हो गए और जिस शुरुआत में उन्होंने एक विचार किया था, आशु की जिंदगी में एक नई धमाका फेल हो गया था।
फिर भी दोनों दोस्त के रूप में बने रहे। वे एक दूसरे के साथ बॉल खेलने, रात को चिट्ठियों लिखने, और शुभ यात्राएं करने आते थे। दोनों के पास अपने भाई और बहन होने के बावजूद दोनों को अपने दोस्तों जैसा ही महसूस होने लगा। इस तरह तीसरे साल के अंत में वह अपने दोस्तों के घर पर एक सुंदर पार्टी का भंडार देख सके। दोस्त अपने करीबी दोस्तों के साथ बातचीत करते हुए खुश थे।
हालांकि, जब आशु ने उस शाम बेड कलेक्शन के समान एक मूल्यवान चीज के लिए लौटते वक्त देखते हुए देखा, तो उसका दिल टूट गया। इस चीज के अमूल्य तथा अमूल्य मूल्य के बारे में सोचते हुए वह आँसू बहा रहा था।
धीरे-धीरे वह अपने दोस्त के साथ अपनी चिंताओं को साझा करना शुरू कर दिया। विवेक के इसके लिए समझा कि जीवन में कोई भी चीज अमूल्य नहीं है। उसने कहा कि उसके लिए उस चीज के मौजूदा मूल्य से अधिक महत्वपूर्ण था, जो उसके दोस्त उसके रूप में था।
उसने आशु को एक बहुत ही महत्वपूर्ण सबक सिखाया जो उसे अमूल्य था। उसने आशु के मन की शांति जमाने में सहायता की और वह अपने दोस्त के करीब हो गया।
दोस्ती का सच यह है कि अच्छा दोस्त उस शख्स को हमेशा सहायता दे सकता है, जिसे वह समझने से डरता था। अच्छा दोस्त उस शख्स के लिए सहायता कर सकता है, जो खुशी या चिन्ता विवेक नहीं कर सकता है।