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दो दिलों की जंग एक बचपन की कहानी है जो

Title: दो दिलों की जंग

एक बचपन की कहानी है जो दो बच्चों से जुड़ी हुई है। वे दोनों एक ही स्कूल में थे लेकिन एक दूसरे के साथ बहुत कम बात करते थे। फिर भी वे एक-दूसरे की तरफ अक्सर देखा करते थे।

उनमें से एक का नाम रोहित था जो एक मधुर व्यक्तित्व था। दूसरे बच्चे का नाम राहुल था जो बहुत ही जिद्दी था।

ये दोनों जब-जब एक-दूसरे को देखते थे तो रोहित उसको मुस्कुराता था लेकिन राहुल आस-पास के लोगों की खिसियानी अक्सर उसको नुकसान पहुंचाते थे।

जब इन दोनों के स्कूल में कुछ दिन बाकी रह गए तो एक स्पर्धा मनाई गई। स्पर्धा उनको एक-दूसरे के साथ टीम बनने के लिए कहती थी। झगड़ा शुरू हो गया और राहुल ने जिद्द करके अपने दोस्त से यह कहा कि वह सबसे बेहतर खिलाड़ी है और उसे चुना जाना चाहिए। रोहित कुछ नहीं बोला लेकिन वह बहुत ही हृदयस्पर्शी था। गुस्से से भरे राहुल और खुशी से झूमते हुए रोहित अलग-अलग स्कूल बसों में चले गए।

स्कूल का अगला दिन, टीम का चयन हुआ और राहुल टीम में नहीं शामिल हुआ। वह गलती करने से गुरेज नहीं लिया गया था। इससे वह बहुत खुश नहीं था लेकिन फिर भी वह गुस्से में था। टीम ने चलने के लिए तैयार हो गई और जब वे बाहर स्टेडियम में पहुंचे तो रोहित को देखा गया। वह टीम में शामिल था।

राहुल को इस बात से बेहद गुस्सा हुआ कि उसे नहीं चुना गया और उसके साथ से उसके दोस्त ने उसे धोखा दिया।

टीम ने अब कुछ भी जीतने के लिए नहीं हार मानने को तैयार हो गई थी। मुकाबला शुरू हुआ और इस टीम के टोपगन्देबाजों ने गेंदबाजों को पूरे धो डाला। इससे उन्हें फाइनल खेल जीतने के लिए नहीं चाहिए था।

रोहित अपनी टीम को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण रोल निभाता था। वह देखता था कि उनका टोटल स्कोर पूरा नहीं हो रहा है। उसकी टीम के बच्चे हार गए थे। रोहित सबसे पहले बल्लेबाज बन जाता था और उसके आपकी पहली बैलिंग करता था। रोहित ने अपने ब्याट पर स्टैंड करके समय से पहले गेंद को मारा जब तक वह बाउंडर से लॉग ऑफ किया नहीं था जब तक वह 4 नहीं आ जाता था।

जब रोहित का मैदान से बहार आना हुआ तो राहुल से वह चिढ़ाने के लिए लाइन में खड़ा हो गया। इस बार रोहित ने उसको खाने के लिए नहीं दिया।

फाइनल में अपनी टीम को जीत के लिए आगे लाने के बाद, रोहित को टैफन-से-भरे फोंटो और आशीर्वाद मिला जो मैच में उसे स्थिर रखने में मदद करते थे। राहुल को वह देखता था जो उसे झुकने से मजबूर कर रहा था।

फाइनल में उन्होंने अपने आप को बचा लिया था और उन्होंने दिखाया कि वह एक बेहतर दोस्त हैं। उस दिन से पहले उन्होंने एक-दूसरे के साथ खुश हो जाना था और उनकी दोस्ती मजबूत हो गई थी।

आज वे दोनों एक-दूसरे की जिंदगियों का हिस्सा हैं और जब भी वे एक-दूसरे से मिलते हैं, तो उनके आँखों में दोस्ती की ज्वाला आगे बढ़ती रहती है।

कागा जी

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