कश्मीर की समस्या और जेन-जी का ‘कूल’ समाधान
वाह! धन्य हैं वाशिंगटन और टोक्यो के वातानुकूलित कमरों में बैठकर दुनिया सुधारने वाले ‘द डिप्लोमैट’ के महान बुद्धिजीवी। उन्होंने एक ऐसा ऐतिहासिक शोध प्रस्तुत किया है, जिसे पढ़कर कार्ल मार्क्स की आत्मा भी अपनी कब्र में ‘फॉर यू पेज’ (FYP) स्क्रॉल कर रही होगी। पत्रिका का ताजा सवाल है—“क्या कश्मीर भारत के जेन-जी (Gen Z) आंदोलन से कुछ सीख सकता है?” सचमुच, इससे अधिक क्रांतिकारी विचार इस सदी में नहीं आया! कश्मीर के युवा, जो दशकों से कर्फ्यू, इंटरनेट ब्लैकआउट और पेलेट गन्स के साए में जी रहे हैं, उन्हें अब दिल्ली-मुंबई के ‘कैपुचीनो-क्रांतिकारियों’ से सीखना चाहिए कि असली संघर्ष क्या होता है।
‘लाइक’ और ‘शेयर’ से बदलेगा कश्मीर का भूगोल?
गंभीरता से सोचिए, कश्मीर के युवाओं को अब पत्थरों और नारों की क्या जरूरत है? उन्हें तो बस एक अच्छे फ्रंट कैमरे वाले स्मार्टफोन और ट्रेंडी म्यूजिक की दरकार है। ‘द डिप्लोमैट’ के ज्ञानवीरों के अनुसार, कश्मीर की जटिल राजनीतिक और भौगोलिक समस्याओं का समाधान ‘इंस्टाग्राम रील्स’ और ट्विटर के ट्रेंड्स में छिपा है। यदि घाटी में इंटरनेट बंद हो, तो क्या हुआ? जेन-जी का पहला पाठ ही यही होना चाहिए कि “बिना इंटरनेट के एस्थेटिक उदासी वाली स्टोरी कैसे पोस्ट करें।” कश्मीरियों को सीखना होगा कि जब अधिकारों की बात आए, तो सीधे सड़क पर उतरने के बजाय एक ‘पिंक पैम्फलेट’ डिजाइन करके उसे अपनी इंस्टा स्टोरी पर लगा दें और नीचे लिख दें—’माय प्रोनॉन्स आर शे/हर/दे।’
पेलेट गन का मुकाबला ‘कैंसिल कल्चर’ से
कश्मीर में जब सुरक्षा बल सामने हों, तो पत्थर फेंकने की जगह जेन-जी वाले ‘कैंसिल कल्चर’ का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता? सुरक्षा बलों को सोशल मीडिया पर ‘टॉक्सिक’ घोषित कर दिया जाए, उनके खिलाफ एक हैशटैग चलाकर उन्हें ‘ब्लॉक’ कर दिया जाए! कितना सरल और अहिंसक समाधान है। ‘द डिप्लोमैट’ के इन कलमघसीटों को शायद यह नहीं पता कि जब कश्मीर में हफ़्तों इंटरनेट बंद रहता है, तब वहां का युवा जेन-जी के ‘डिजिटल एक्टिविज्म’ के बारे में सोचकर केवल ठंडी सांस ही भर सकता है।
अंत में, ‘काक-वाणी’ की तरफ से ‘द डिप्लोमैट’ के संपादकों को मुफ्त की सलाह: अगली बार जब आप कश्मीर पर ज्ञान बांटें, तो दक्षिण दिल्ली के किसी महंगे कैफे से बाहर निकलकर असल दुनिया देख लें। वहां जीवन रील्स से नहीं, कठोर वास्तविकताओं से चलता है। लेकिन तब तक, कश्मीर के लोगों, कृपया अपनी रील्स की स्क्रिप्ट तैयार रखिए, क्या पता कब कोई नया हैशटैग आपकी किस्मत बदल दे!
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