भारत में ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड की साख खतरे में है, क्योंकि देश के हर घर में ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के मानद प्रोफेसर सुबह-सुबह चाय की चुस्की के साथ ज्ञान की गंगा बहा रहे हैं। इस विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ बिना किसी प्रवेश परीक्षा के, केवल ‘Forwarded as received’ का बटन दबाकर आप सीधे ‘परमाणु वैज्ञानिक’ या ‘अंतरराष्ट्रीय इतिहासकार’ की मानद उपाधि पा सकते हैं।
नासा और यूनेस्को की ‘गुप्त’ डीलिंग
हाल ही में हमारे पारिवारिक ग्रुप में एक ‘महा-शोध’ तैरता हुआ आया। दावा था कि यूनेस्को ने भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया है। कमाल की बात यह है कि यूनेस्को पिछले दस सालों से हर साल बिना थके यह घोषणा कर रहा है! वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का तो पूरा विभाग ही शायद केवल दिवाली के दिन भारत की जगमगाहट वाली रंग-बिरंगी तस्वीर खींचने और ग्रहण के समय तुलसी के पत्तों पर शोध करने के लिए ही बचा है। हमारे व्हाट्सएप वैज्ञानिकों के अनुसार, नासा वाले हर संक्रांति पर भारतीय पंचांग देखकर ही रॉकेट लॉन्च करते हैं।
सच्चाई का कड़वा घूंट और फैक्ट चेक
अब बात करते हैं उस कड़वी सच्चाई की, जिसे व्हाट्सएप के ‘परम ज्ञानी’ एडमिन अक्सर ‘विदेशी साजिश’ कहकर खारिज कर देते हैं। सच्चाई यह है कि नासा के पास ऐसी किसी सतरंगी दिवाली वाली तस्वीर का कोई अस्तित्व नहीं है, वह महज एक घटिया फोटोशॉप की कलाकारी है। यूनेस्को के पास विभिन्न देशों के राष्ट्रगान को तौलने वाला कोई थर्मामीटर नहीं है और न ही उन्होंने ऐसा कोई अवार्ड बांटा है। लेकिन हमारे फूफाजी और मौसाजी को इन तथ्यों से क्या लेना-देना? उनके लिए तो ‘इस संदेश को 11 लोगों को भेजने पर शाम तक मिलेगी खुशखबरी’ वाला संदेश ही जीवन का अंतिम सत्य है।
ज्ञानियों से सावधान रहें!
इस विश्वविद्यालय की डिग्री बिल्कुल मुफ्त है, लेकिन इसकी भारी कीमत हमारा समाज अपना सामान्य ज्ञान और तर्कशक्ति खोकर चुका रहा है। यहाँ ‘कैंसर के अचूक इलाज’ से लेकर ‘पेट्रोल सस्ता होने के गुप्त फॉर्मूले’ तक सब कुछ उपलब्ध है। तो अगली बार जब आपके मोबाइल की घंटी बजे और कोई संदेश आपको ‘चमत्कारी काढ़े’ से अमर होने का दावा करे, तो अपने अंगूठे को थोड़ा विश्राम दें। याद रखें, हर फॉरवर्डेड मैसेज सच नहीं होता, और हर ज्ञान देने वाला फूफा वैज्ञानिक नहीं होता!