‘नासा की मुहर’ से ‘यूनेस्को के बेस्ट राष्ट्रगान’ तक: व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के अद्भुत अविष्कार

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के प्यारे ‘ज्ञानार्थियों’ और ‘फॉरवर्ड-वीर’ योद्धाओं का ‘काक-वाणी’ के इस विशेष अंक में स्वागत है। आज हम उस परम सत्य की खोज करेंगे जो केवल और केवल आपके पारिवारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स में ही पाया जाता है। सुबह की ‘गुड मॉर्निंग’ वाली चमकती गुलाब की फोटो से लेकर ‘यूनेस्को द्वारा घोषित सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ तक, इस विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम अनंत है। यहाँ सत्य की परिभाषा बहुत सरल है—अगर वह फॉरवर्डेड है, तो वह शत-प्रतिशत सच है!

यूनेस्को का ‘सदाबहार’ पुरस्कार और नासा की ‘दिवाली लाइटें’

साल के बारह महीने और हर तीसरे हफ्ते हमारे देश के राष्ट्रगान को यूनेस्को (UNESCO) द्वारा ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित कर दिया जाता है। यूनेस्को के दफ्तर में शायद एक बाबू सिर्फ इसी काम के लिए बैठा है कि वह रोज सुबह उठकर भारत को कोई न कोई नया सर्टिफिकेट जारी करे। और नासा (NASA) के वैज्ञानिकों का तो क्या कहना! अंतरिक्ष में सैटेलाइट लगाकर वे सिर्फ इस ताक में रहते हैं कि कब भारत में दिवाली आए और वे अंतरिक्ष से जगमगाते भारत की वह जादुई फोटो खींचकर व्हाट्सएप पर भेजें, जिसे देखकर हर देशभक्त का सीना चौड़ा हो जाता है। भले ही वह फोटो 2005 की एडिटेड ग्राफिक इमेज हो, लेकिन भावनाएं 100% शुद्ध होनी चाहिए।

‘अंगूठे की गति’ और घरेलू नुस्खों का चमत्कार

इस विश्वविद्यालय के चिकित्सा विभाग (Medical Faculty) का तो कोई जवाब ही नहीं है। यहाँ कैंसर से लेकर जुकाम तक का इलाज सिर्फ दो बूंद नींबू के रस या नाक में सरसों तेल डालने से हो जाता है। पिछले दिनों एक दावा वायरल हुआ कि इलायची को कान में रखने से ऑक्सीजन का लेवल बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने जब अपना सिर दीवार पर दे मारा, तब जाकर लोगों को समझ आया कि ऑक्सीजन फेफड़ों से जाती है, कानों से नहीं। लेकिन हमारे फॉरवर्ड-वीरों को इससे क्या? वे तो बस ‘कृपया इसे जनहित में शेयर करें’ पढ़कर अपने पवित्र कर्तव्य में जुट जाते हैं।

निष्कर्ष: आँखें खोलो, फॉरवर्ड रोको!

व्हाट्सएप पर तैरते इन ‘महान सत्यों’ की कड़वी सच्चाई यह है कि इनका वास्तविकता से दूर-दूर तक का कोई नाता नहीं होता। अगली बार जब आपके पास ‘इस संदेश को 11 लोगों को भेजने से लॉटरी लगेगी’ वाला मैसेज आए, तो थोड़ा रुकें। अपने अंगूठे को थोड़ा आराम दें और दिमाग के उस हिस्से का इस्तेमाल करें जिसे ‘विवेक’ कहते हैं। अफवाहों की इस दुनिया में सच को बचाए रखना ही सबसे बड़ी देशभक्ति है, वरना नासा वाले सचमुच आपके ज्ञान पर रिसर्च करने भारत आ जाएंगे!

कागा जी