बचपन के दोस्त
Childhood Friends
वीर और शिवांग बचपन के दोस्त थे। दोनों मिलकर हँसी मजाक करते थे। कभी वो पेड़ पर चढ़ते थे तो कभी खेतों में वादे करते थे कि जब बड़े होंगे तो एक साथ एक फ़र्म खाड़ी करेंगे।
जब दोनों का बचपन अब जाने कौन से साल में चल रहा था तो एक दिन अाप प्रीतम जी के फ़ोन आया। उन्होंने बताया कि उनकी एक फ़ैमिली के कृषि फ़ार्म पर इनेंटर्नशिप के लिए दोनों को बुलाया है।
वीर और शिवांग दोनों आगे बढ़ा, और वह फ़ार्म घुमने आ गए। वह देखा कि हरियाणा के एक मोड़ पर एक सुंदर सा फ़ार्म है। वे उस फ़ार्म तक पहुंचते ही उनके चेहरों पर सुझाव टेढ़ा पड़ जाता है।
जब वे फ़ार्म पहुंचे तो वीर ने देखा कि उस फ़ार्म वासी के घर की छत गिर गयी है। उसी के कारण उन्हें नए रूम में रखना पड़ा।
वीर एक सुंदर रूम में रहता था जो कृषि फ़ार्म के समीप था, जबकि शिवांग उस पुराने घर में रहता था। शिवांग की स्थिति दर्द नकलती थी। एक रात उर्वशी उसे जबरदस्ती सुंदर रूम में खड़ा करके साहस दिया। फिर उसने वीर से अपने स्थान पर रहने की अनुमति मांगी, और वीर ने अपने बेहतरीन रूम का निर्णय लिया।
यह कैसे हो सकता है कि दोस्त पर्यवेक्षण न करें? यह हुआ नहीं था। दोनों दिन समय वकार किया और हमेशा एक साथ काम किया। उर्वशी ने सुना कि इन दोनों दोस्तों का क्या इतना सम्बन्ध है, उसने उनको पत्नी के द्वारा बहुत कुछ सिखाया है।
अब वह प्रारम्भ हो गयी जब उन्हें प्रश्न करना है। उन्होंने वीर से पूछा तुम शिवांग को अपने बेहतरीन रूम में बिठाए बिना भ्यागचदूर कैसे हो सकते हो?
फिर उर्वशी ने बताया कि जो बचपन में दोनों एक साथ होते हैं वो एक साथ बड़े होकर भी हमेशा एक साथ रहते हैं। उन्होंने पहली बार एक दूसरे के सच्चे दोस्त का भावनात्मक समझ जाना था।
वीर ने उर्वशी को धन्यवाद कहा और उसे उनके घर तक लेके गया।
यह एक दोस्ती है जो सिर्फ एक साथ एक फ़ार्म खड़ी कर देती है। इसलिए, हमेशा आशा कीजिए कि आपके दोस्तों का महत्व न सिर्फ आपके जीवन में बचपन से होता है, बल्कि वह महत्वपूर्ण भी होता है।