बहुपक्षवाद का ‘त्रिशूल’: जब बिल्ली, चूहा और नेवला मिलकर लगे ‘शाकाहार’ का उपदेश देने!

वाह! क्या विहंगम दृश्य है। ग्लोबल कूटनीति के रंगमंच पर एक ऐसा नाटक मंचित हो रहा है, जिसे देखकर शेक्सपियर भी अपनी कब्र में लोट-पोट हो जाएं। खबर आई है कि भारत, कनाडा और यूरोपीय संघ (EU) ने मिलकर ‘बहुपक्षवाद’ (Multilateralism) की ढाल उठाने और ‘पावर पॉलिटिक्स’ यानी ताकत की राजनीति के खिलाफ चिंता जताने का फैसला किया है। यह बिल्कुल वैसा ही है, जैसे जंगल के तीन सबसे चतुर शिकारी मिलकर अचानक हिरणों की सुरक्षा पर सेमिनार आयोजित करने लगें।

‘खट्टा-मीठा’ भाईचारा: कनाडा और भारत की जुगलबंदी

इस त्रिकोणीय प्रेम कहानी में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली जोड़ी है—भारत और कनाडा। अभी कल तक दोनों देशों के राजनयिक एक-दूसरे को ऐसे देख रहे थे जैसे सास अपनी नई बहू को घूरती है। कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो रोज़ सुबह उठकर भारत पर नए कूटनीतिक आरोप लगाने का रियाज़ करते हैं, और भारतीय विदेश मंत्रालय दोपहर तक उनकी तान तोड़ देता है। लेकिन जब बात ‘बहुपक्षवाद’ की आई, तो दोनों ऐसे सुर में सुर मिला रहे हैं जैसे कुंभ के मेले में बिछड़े सगे भाई हों। इसे कहते हैं शुद्ध कूटनीतिक दोगलापन, जिसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों की भाषा में ‘प्रैग्मैटिज्म’ कहकर इज्जत बख्शी जाती है।

यूरोपीय संघ: बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

इस त्रिमूर्ति के तीसरे स्तंभ हैं हमारे यूरोपीय संघ (EU) वाले साहब। यूरोपीय संघ का खुद का यह हाल है कि उनके अपने कुनबे में कब कौन सा देश ‘ब्रेक्सिट’ करके भाग जाए या यूक्रेन मुद्दे पर किसके सुर बदल जाएं, कुछ पता नहीं रहता। लेकिन वैश्विक मंच पर आते ही इन्हें दुनिया भर के ‘पावर पॉलिटिक्स’ की चिंता सताने लगती है। जब तक अमेरिका की दादागिरी चलती है, तब तक इन्हें सब चंगा लगता है, लेकिन जैसे ही वैश्विक संतुलन बिगड़ता है, इन्हें ‘मल्टीलेटरलिज्म’ नामक पुराना राग याद आ जाता है।

काक-वाणी का कटाक्ष: असली पावर किसके पास?

काक-वाणी के चश्मे से देखें तो यह चिंता असल में ‘ताकत की राजनीति’ के खिलाफ नहीं है, बल्कि इस बात की टीस है कि ‘रिमोट कंट्रोल’ इस समय उनके हाथ में नहीं है। कूटनीति का नियम सरल है—जब तक ताकत आपके पास हो, वह ‘वैश्विक व्यवस्था’ कहलाती है, और जब वही ताकत कोई और दिखाने लगे, तो वह ‘पावर पॉलिटिक्स’ बन जाती है।

खैर, इस ऐतिहासिक एकता के लिए तीनों पक्षों को ‘काक-वाणी’ की ओर से ढेरों शुभकामनाएं। उम्मीद है कि अगली बैठक में भारत और कनाडा एक-दूसरे के खिलाफ जारी किए गए बयानों को इसी ‘बहुपक्षवाद’ के पवित्र गंगाजल से धोकर पवित्र कर लेंगे। तब तक के लिए, कूटनीति के इस कॉमेडी सर्कस का मुफ्त में आनंद उठाइए!


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कागा जी