वाह! क्या देश है और क्या हमारे देश के दूरदर्शी उद्यमी नेता हैं! हम और आप यहाँ सुबह से शाम तक गधे की तरह मेहनत करके टैक्स चुकाने का रोना रोते हैं, और उधर कुछ अति-बुद्धिमान लोगों ने करोड़पति बनने का ऐसा ‘जीरो-इन्वेस्टमेंट’ बिजनेस मॉडल ढूंढ निकाला है कि बीबीसी वाले भी दांतों तले उंगली दबा रहे हैं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं भारत के RUPPs यानी ‘पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों’ की, जो लोकतंत्र के नाम पर टैक्स-फ्री चंदे की दुकान चला रहे हैं।
चुनाव लड़ना आउटडेटेड है, असली मज़ा तो चंदे में है!
अगर आपको लगता है कि राजनीति करने के लिए जनता के बीच जाना पड़ता है, पसीना बहाना पड़ता है और हाथ जोड़ने पड़ते हैं, तो आप कतई आदिम काल में जी रहे हैं। हमारे इन आधुनिक चतुर सुजानों ने साबित कर दिया है कि राजनीति के लिए ‘वोट’ की नहीं, बस चुनाव आयोग के एक ‘रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट’ की जरूरत होती है। एक बार सर्टिफिकेट मिल गया, तो एक भारी-भरकम नाम रखिए—जैसे ‘अखिल भारतीय जन-कल्याण चमत्कारी मोर्चा’—और बस, आपकी टैक्स-फ्री लॉटरी खुल गई!
बीबीसी की खोजी रिपोर्ट बताती है कि इन गुमनाम पार्टियों के खातों में विदेशों से लाखों-करोड़ों डॉलर बरस रहे हैं। ये ऐसी पार्टियां हैं जिनका दफ्तर ढूंढने में गूगल मैप भी हाथ खड़े कर दे, लेकिन विदेशी चंदे का पैसा इनका पता बिल्कुल सटीक ढूंढ लेता है। इन पार्टियों ने आज तक न कोई चुनाव लड़ा है, न इनके पास कोई कार्यकर्ता है, लेकिन इनके बैंक खातों का बैलेंस देखकर किसी भी मल्टीनेशनल कंपनी के सीईओ को कॉम्प्लेक्स हो जाए।
टैक्स छूट की ‘गंगा’ और मनी लॉन्ड्रिंग का पवित्र स्नान
भारतीय आयकर कानून की धारा 80GGB और 80GGC का ऐसा रचनात्मक उपयोग केवल हमारे देश के महान ‘टैक्स प्लानर्स’ ही कर सकते हैं। बड़े-बड़े कॉरपोरेट घराने और रईस लोग इन अदृश्य पार्टियों को ‘चंदा’ देते हैं, सरकारी खजाने को ठेंगा दिखाकर सौ प्रतिशत टैक्स की छूट पाते हैं, और फिर पिछले दरवाजे से अपना कमीशन काटकर नकदी वापस ले लेते हैं। यह एक ऐसी जादुई मशीन है जिसमें इधर से काला धन डालो, उधर से सफेद होकर बाहर निकलता है!
‘काक-वाणी’ देश के तमाम हताश और बेरोजगार युवाओं को सलाह देती है कि वे सरकारी नौकरी और स्टार्टअप के चक्कर में अपनी जवानी बर्बाद करना छोड़ें। तुरंत एक राजनीतिक दल रजिस्टर कराएं। जब तक इस देश में टैक्स बचाने की चाहत और कानून की ढिलाई जिंदा है, तब तक RUPPs का यह धंधा कभी मंदा नहीं होने वाला। बोलिए, लोकतंत्र की जय हो और चंदा देने वालों का कल्याण हो!
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