वाह! सुबह-सुबह ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने यह खबर छापकर हमारी छाती 56 इंच से बढ़ाकर सीधे 112 इंच की कर दी। अखबार लिखता है कि भारत अब यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए ‘गंभीर’ हो रहा है। यह पढ़कर ही पुतिन के हाथ से वोदका का गिलास छूट गया होगा और जेलेंस्की ने अपने ऑलिव ग्रीन टी-शर्ट को इस्त्री करने के लिए दे दिया होगा। आखिर जब PM Narendra Modi और भारत की कूटनीति किसी मुद्दे पर ‘सीरियस’ हो जाए, तो युद्ध की क्या मजाल कि वो जारी रहे?
विश्वगुरु का नया ‘जादुई झप्पी’ मिशन
अब तक तो पुतिन और जेलेंस्की सिर्फ इसलिए लड़ रहे थे क्योंकि उन्हें भारत की तरफ से कोई ‘कड़ा संदेश’ नहीं मिला था। जैसे ही हमारे नेताजी जाकर उनके कंधे पर हाथ रखेंगे, दोनों देशों के टैंक खुद-ब-खुद सफेद झंडे लहराने लगेंगे। आखिरकार, हमारी कूटनीति का मूल मंत्र ही यही है – ‘वसुधैव कुटुंबकम’, यानी पूरा विश्व हमारा परिवार है, भले ही इस परिवार के अपने सदस्य (पड़ोसी देश) हमसे बात तक न करना चाहते हों। रूस को थोड़ा योग सिखाएंगे और यूक्रेन को हल्दी वाला दूध पिलाएंगे, सारा तनाव छूमंतर हो जाएगा। हम दोनों को एक ही मेज पर बिठाएंगे और कहेंगे, “चलो, अब पुरानी बातें भूलो, आपस में गले मिलो और ‘जय हिंद’ बोलो!”
घर के गड्ढे बाद में, पहले यूरोप का नक्शा दुरुस्त करेंगे
कुछ देशद्रोही और नकारात्मक सोच वाले लोग पूछ रहे हैं कि भाई, हमारे अपने शहरों की सड़कें चंद्रमा की सतह जैसी क्यों दिख रही हैं? हमारे लोकल चुनाव में लाठियां क्यों चल रही हैं? लेकिन इन अल्पबुद्धि लोगों को कौन समझाए कि असली मज़ा छोटे-मोटे घरेलू विवाद सुलझाने में नहीं, बल्कि यूरोप का नक्शा दुरुस्त करने में है। जब PM Narendra Modi का वैश्विक प्रभाव इतना बड़ा हो, तो नाली और सड़क जैसे तुच्छ मुद्दों पर ध्यान देकर अपना कीमती समय क्यों खराब करना?
वैसे भी, जब तक हम दुनिया की समस्याओं को सुलझाने में व्यस्त रहेंगे, तब तक देश की जनता का ध्यान महंगाई और बेरोजगारी जैसी फालतू चीजों पर नहीं जाएगा। यह एक बेहतरीन ‘टाइम-पास’ कूटनीति है।
‘काक-वाणी’ का तो यही मानना है कि अब पुतिन और जेलेंस्की को अपने हथियार सरेंडर कर देने चाहिए। वैसे भी, भारत की कूटनीति इतनी गंभीर है कि अगर युद्ध नहीं रुका, तो हम दोनों देशों पर ‘कड़ी निंदा’ का परमाणु बम गिरा देंगे। तो यूक्रेन वालों, बोरिया-बिस्तर समेटो, विश्वगुरु आ रहे हैं शांति का प्रसाद बांटने!
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