हाल ही में सोशल मीडिया की गलियों में एक नया और अनोखा ‘फैक्ट-चेक’ तंत्र विकसित हुआ है। इसका मुख्य केंद्र और अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ है। यहाँ के कुलाधिपति, स्वयंभू प्रोफेसर और बिना वेतन काम करने वाले शोधकर्ता दिन-रात एक करके ऐसी-ऐसी जानकारियों का सत्यापन कर रहे हैं, जिन्हें सुनकर खुद विज्ञान और तर्कशास्त्र भी अपने घुटने टेक दें। काक-वाणी की विशेष टीम ने इस नए दौर के ‘फैक्ट चेक’ का गहन और विश्लेषणात्मक अध्ययन किया है।
‘फैक्ट-चेक’ का नया ‘व्हाट्सएप फॉर्मूला’
पुराने जमाने में लोग खबर की सच्चाई जानने के लिए अखबार पढ़ते थे या आधिकारिक बयानों का इंतजार करते थे। लेकिन डिजिटल क्रांति के इस पावन दौर में फैक्ट चेक का तरीका बेहद सरल हो चुका है। नियम सीधा है: यदि किसी मैसेज के ऊपर ‘Forwarded many times’ लिखा है, तो समझ लीजिए कि वह परम सत्य है। इसके बाद किसी अन्य सबूत की आवश्यकता ही नहीं बचती। व्हाट्सएप के ज्ञानी बाबाओं का अटूट नियम है कि जो खबर जितनी ज्यादा शेयर होगी, उसकी सत्यता अपने आप 100 प्रतिशत हो जाएगी।
नासा और यूनेस्को की रातों की नींद हराम
व्हाट्सएप के इस नए फैक्ट-चेकिंग सिस्टम में सबसे बड़ा योगदान बेचारी दो संस्थाओं—नासा (NASA) और यूनेस्को (UNESCO) का है। व्हाट्सएप के फैक्ट-चेकर्स के अनुसार, यूनेस्को हर दूसरे सोमवार को भारत के किसी न किसी त्यौहार, भाषा या समोसे को ‘दुनिया में सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करता रहता है। दूसरी तरफ, नासा के वैज्ञानिक अंतरिक्ष की खोज छोड़ रात-दिन इसी शोध में लगे हैं कि कैसे नीम की पत्ती से 5G नेटवर्क की स्पीड बढ़ाई जा सकती है। जब भी किसी फर्जी खबर पर ‘नासा ने प्रमाणित किया’ का ठप्पा लग जाता है, तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के छात्र उसे गीता का ज्ञान मानकर आगे बढ़ा देते हैं।
‘काक-वाणी’ का विशेष फैक्ट चेक
जब हमारी काक-वाणी टीम ने इस पूरे मामले का अपना फैक्ट चेक किया, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। पता चला कि इस पूरी यूनिवर्सिटी का इकलौता ईंधन ‘फ्री का डेटा’ और ‘खाली दिमाग’ है। यहाँ सच को झूठ और झूठ को ब्रह्मास्त्र बनाने में ठीक उतना ही समय लगता है, जितना एक मैसेज को सिलेक्ट करके ‘फॉरवर्ड ऑल’ दबाने में लगता है।
निष्कर्ष: यदि आपके पास भी कोई ऐसा मैसेज आए जिसमें लिखा हो कि ‘इसे 11 ग्रुपों में भेजो, शाम तक 500 का नोट मिलेगा’, तो समझ जाइए कि फैक्ट-चेक पूरा हो चुका है। नोट तो नहीं मिलेगा, हाँ, आपकी समझदारी पर 500 का फाइन ज़रूर लग सकता है। इसलिए सावधान रहें, सतर्क रहें और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के डिग्रीधारियों से उचित दूरी बनाकर रखें!