नमस्कार पाठकों! ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। यह वह एकमात्र विश्वविद्यालय है जहां दाखिले के लिए किसी परीक्षा की नहीं, बल्कि केवल एक स्मार्टफोन और अंगूठे में ‘फॉरवर्ड’ दबाने की फुर्ती की आवश्यकता होती है। यहां डिग्री नहीं मिलती, सीधे ‘परमज्ञानी’ होने का प्रमाण पत्र मिलता है, जिसे आप सुबह-सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ के गुलाब के फूलों के साथ दूसरों को बांट सकते हैं।
जब यूनेस्को थक गया अवार्ड बांटते-बांटते
पिछले कई वर्षों से व्हाट्सएप के गलियारों में एक खबर घूम रही है कि यूनेस्को (UNESCO) ने भारत के राष्ट्रगान को ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित किया है। यूनेस्को के मुख्यालय में अधिकारी रोज सुबह उठकर चाय पीते हुए यही सोचते होंगे कि भाई, हमने यह अवॉर्ड कब और किसे दे दिया? असलियत यह है कि यूनेस्को ऐसी कोई घोषणा ही नहीं करता। लेकिन हमारे पारिवारिक ग्रुप्स में इस संदेश को न भेजने वाले को राष्ट्रद्रोही घोषित कर दिया जाता है। सच तो यह है कि यूनेस्को को खुद नहीं पता कि उनके नाम पर व्हाट्सएप पर कितनी योजनाएं चल रही हैं।
नासा का नया अनुसंधान: तुलसी और शंख से वाई-फाई
वैज्ञानिकों ने सालों रिसर्च की, लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स ने एक ही मैसेज में साबित कर दिया कि नासा ने माना है कि तुलसी के पौधे से वाई-फाई की तरंगें निकलती हैं और शंख बजाने से कोरोना वायरस भाग जाता है। नासा (NASA) वाले बेचारे दिन-रात अंतरिक्ष में टेलिस्कोप लगाकर एलियंस ढूंढ रहे हैं, जबकि उन्हें केवल भारतीय व्हाट्सएप ग्रुप्स ज्वाइन कर लेने चाहिए। उन्हें ब्रह्मांड के सारे रहस्य, जैसे कि ‘इलायची खाने से कैंसर का इलाज’ और ‘सोने से पहले तांबे के बर्तन में पानी पीने से अमरता की प्राप्ति’, यहीं मिल जाएंगे।
चांद पर सुनाई दी ‘ॐ’ की ध्वनि!
एक और लोकप्रिय ज्ञान यह है कि जब नासा का अंतरिक्ष यान चांद पर गया, तो वहां अंतरिक्ष यात्रियों को ‘ॐ’ की ध्वनि सुनाई दी। अब अंतरिक्ष वैक्यूम (शून्य) है जहां ध्वनि यात्रा ही नहीं कर सकती, यह भौतिकी की बेसिक किताब में लिखा है। लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के सामने न्यूटन और आइंस्टीन के नियम पानी भरते नजर आते हैं। यहां विज्ञान की अपनी ही एक समानांतर दुनिया चलती है जहां लॉजिक का प्रवेश वर्जित है।
तथ्य जांच: फॉरवर्ड करने से पहले सोचें
इस हंसी-मजाक के पीछे एक गंभीर सच्चाई भी है। फेक न्यूज यानी झूठी खबरें फैलाना आजकल एक गंभीर समस्या बन चुका है। यूनेस्को का कोई अवॉर्ड हो या नासा का कोई कथित दावा, बिना किसी प्रामाणिक स्रोत (Authentic Source) के किसी भी मैसेज पर विश्वास न करें। गूगल बाबा आपके फोन में ही हैं, जरा सा सर्च कर लेंगे तो विज्ञान और इतिहास दोनों का कत्ल होने से बच जाएगा। इसलिए अगली बार जब फूफा जी ग्रुप में कोई ‘क्रांतिकारी खोज’ भेजें, तो उसे ‘फॉरवर्ड’ करने के बजाय ‘फैक्ट-चेक’ का आईना जरूर दिखाएं।