यदि आपके पास सुबह-सुबह “गुड मॉर्निंग” के साथ गुलाब के फूल पर ओस की बूंदों वाला चित्र और नीचे लिखा संदेश आता है कि “इसे ११ लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी”, तो बधाई हो! आप दुनिया के सबसे बड़े और बिना मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय “व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी” के सक्रिय छात्र हैं। इस विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ प्रवेश के लिए किसी परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती, बस आपके अंगूठे में दम और फोन में इंटरनेट पैक होना चाहिए। यहाँ की डिग्री का नाम है – “परम ज्ञानी”।
नासा और यूनेस्को की विशेष कृपा
हमारे व्हाट्सएप ग्रुप्स के “प्रोफेसर्स” (जिन्हें समाज में हम फूफाजी या पड़ोसी अंकल कहते हैं) के पास नासा और यूनेस्को की सीधी हॉटलाइन होती है। दुनिया में जब भी कोई बड़ी घटना होती है, सबसे पहले यूनेस्को हमारे देश के राष्ट्रगान या संस्कृति को “सर्वश्रेष्ठ” घोषित कर देता है। नासा के वैज्ञानिक चौबीसों घंटे सूर्य की आवाज रिकॉर्ड करने में लगे रहते हैं ताकि वे सिद्ध कर सकें कि वहां से “ॐ” की ध्वनि आ रही है। हद तो तब हो गई जब दो हजार के नोट में जीपीएस चिप होने की खबर इस यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडलिस्ट बनकर निकली। अगर आप इन खबरों पर सवाल उठाएंगे, तो आपको ग्रुप से निष्कासित कर दिया जाएगा क्योंकि “Forwarded many times” का टैग ही इसकी सबसे बड़ी सत्यता की कसौटी है।
चिकित्सा जगत में तहलका: घरेलू नुस्खे
इस विश्वविद्यालय के मेडिकल विभाग का तो कोई मुकाबला ही नहीं है। यहाँ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज सुबह-शाम नींबू पानी पीने से और दिल के दौरे का इलाज दो बूंद अदरक के रस से चुटकियों में कर दिया जाता है। कोरोना काल में तो इस यूनिवर्सिटी ने ऐसे-ऐसे काढ़े और जड़ी-बूटियां खोज निकाली थीं कि खुद यमराज भी भ्रमित हो गए थे। बिना किसी वैज्ञानिक रिसर्च या क्लिनिकल ट्रायल के, केवल “ग्रुप एडमिन” की मुहर से यहाँ दवाइयां धड़ल्ले से बांटी और फॉरवर्ड की जाती हैं।
फैक्ट-चेक: आखिर क्या है सच्चाई?
काक-वाणी के इस विशेष बुलेटिन में सच्चाई का कड़वा घूंट यह है कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी बिना सोचे-समझे फैलाई गई अफवाहों की सबसे बड़ी फैक्टरी बन चुकी है। यहाँ “सूत्रों के हवाले से” मिली जानकारी अक्सर समाज में नफरत और अंधविश्वास फैलाने का काम करती है। असली फैक्ट-चेक यह है कि जो ज्ञान बिना किसी विश्वसनीय समाचार स्रोत या आधिकारिक वेबसाइट के लिंक के आता है, वह केवल कचरा है। इसलिए अगली बार जब आपकी उंगली किसी चमत्कारी मैसेज को “फॉरवर्ड” करने के लिए मचलने लगे, तो अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें, न कि केवल अंगूठे का!