बॉलीवुड के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो वक्त से बहुत आगे होती हैं। शोमैन राज कपूर की ड्रीम परियोजना ‘मेरा नाम जोकर’ भी एक ऐसी ही मास्टरपीस थी। साल 1970 में जब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो इसे भारतीय बॉक्स ऑफिस पर करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। दर्शकों ने इस बेहद लंबी फिल्म को सिरे से नकार दिया, जिससे राज कपूर गहरे कर्ज में डूब गए। लेकिन, असली पिक्चर तो अभी बाकी थी! भारत में फ्लॉप घोषित हुई यह फिल्म सात समंदर पार सोवियत संघ यानी रूस में एक बहुत बड़ी सनसनी बन गई।
जब रूसियों के दिलों पर छा गया भारतीय ‘जोकर’
राज कपूर की इस फिल्म की कुल लंबाई लगभग चार घंटे से भी ज्यादा थी और इसमें दो इंटरवल थे। भारतीय दर्शकों के लिए शायद इस दर्द को पचा पाना थोड़ा मुश्किल था। लेकिन जब ‘मेरा नाम जोकर’ रूस के सिनेमाघरों में पहुंची, तो वहां का नजारा ही कुछ और था। रूसी दर्शकों को जोकर राजू का मासूम चेहरा, उसका अकेलापन और उसका जीवन जीने का फलसफा बेहद पसंद आया। फिल्म के सदाबहार गाने ‘जीना यहां मरना यहां’ और ‘ए भाई जरा देख के चलो’ रूस के गली-कूचों में गूंजने लगे थे।
रूस में क्यों हिट हुए राज कपूर?
काक-वाणी के प्रिय पाठकों, असल में रूस में राज कपूर की दीवानगी पहले से ही चरम पर थी। उनकी पुरानी फिल्म ‘आवारा’ ने रूस में उन्हें एक ग्लोबल सुपरस्टार बना दिया था। जब ‘मेरा नाम जोकर’ वहां रिलीज हुई, तो लोग टिकटों के लिए कतारों में लग गए। वहां के लोगों ने फिल्म की उदासी, इसके गहरे संगीत और राज कपूर की बेमिसाल अदाकारी को अपने सिर-आंखों पर बिठाया। सोवियत संघ में इस फिल्म की जबरदस्त कमाई ने राज कपूर को उस गंभीर वित्तीय संकट से पूरी तरह बाहर निकाल लिया, जिसमें वह डूब चुके थे।
वक्त बदला और जोकर बन गया ‘कल्ट क्लासिक’
यह बेहद दिलचस्प है कि जो फिल्म रिलीज के वक्त भारत में असफल रही थी, आज उसे भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बेहतरीन कल्ट क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है। वक्त ने यह साबित कर दिया कि राज कपूर का विजन अपने समय से बहुत आगे था। रूस में मिली इस अप्रत्याशित और ऐतिहासिक सफलता ने न केवल राज कपूर के गिरते हुए करियर को सहारा दिया, बल्कि भारत-रूस की दोस्ती में भी चार चांद लगा दिए। सच ही कहा गया है, सच्चा कलाकार कभी हारता नहीं है, और राज कपूर के ‘जोकर’ ने यह सच दुनिया को दिखा दिया!
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