Title: रिश्तों की इकाई
ये कहानी है एक गांव की, जहां सभी स्त्री-पुरुष एक दूसरे के रिश्तों में जुड़े हुए थे। इस गांव के सभी लोग एक दूसरे के साथ खुश रहते थे। हर कोई एक दूसरे का सहयोग करता और अपने समस्याओं का समाधान पाने की कोशिश करता था। यही गांव एक संघर्षों भरी कहानी का दृश्य भी था।
गांव में लंबे समय से एक आदमी अपने घर का निर्माण करने के लिए समस्या में फंसा हुआ था। वह अपने परिवार के सबसे बड़े सदस्य थे। इस कारण गांव के हर किसी को उन पर हृदय से दुख होता था।
उस परिवार में दो बच्चे थे। एक सीधा और सच्चा और दूसरा तिरस्कार का शिकार होता। दूसरे बच्चे के नाम थे राकेश।
राकेश एक दिन गांव में सीधे बच्चों के साथ खेलते हुए टक्कर लगा देता है। सभी बच्चे उसे अपनी बाड़ियों से नीचे उतार देते हैं। राकेश गम्भीर रूप से घायल होकर खड़ा रहता है।
उस दिन से गांव में उलझन फैलती है। लोग ज़्यादा से ज़्यादा राकेश को उतारते हैं और तिरस्कार करते हैं।
और तब एक दिन, गांव में स्थिति पतली से पतली होती है। एक आदमी गांव में आता है और कुछ लोगों के सामने खड़ा होकर एक कविता सुनाने लगता है।
कवि बोलता है:
जीवन जितना भी सतर्कता से गुज़रता है,
रिश्तों की दीवारें उसे आसानी से तर-तर से तोड़ती है।
जब एक रिश्ता, दूसरे से अलग होने का सिलसिला जारी होता है,
तब एहसास किया जाता है कि ऐसे महान संघर्ष का बहुत दूर जाना पड़ेगा।
इस कविता से सभी लोग सहमत हो जाते हैं और रिश्तों की इकाई की महत्वपूर्णता समझते हैं।
उन्होंने सभी लोगों से मिलकर उस गरीब परिवार की समस्या को दूर करने का फैसला कर लिया। सभी लोगों ने श्रमदान दिया और उस परिवार को उसकी समस्या का समाधान करने में सहायता की।
एक महीने में गांव में उत्सव का एक आयोजन हुआ। सभी लोग एक साथ समय बिताने लगे। यह उत्सव उन सभी संघर्षों के लिए था, जिन्होंने गांव में सुधार करने के लिए संघर्ष किया था।
उस दिन से गांव में भीड़ नहीं रही। सभी लोग एक दूसरे से भेदभाव नहीं करते थे। राकेश के साथ भी सभी लोग नए रिश्ते बनाने लगे थे।
गांव में सुधार हो गया था। सभी लोग एक साथ रहने की अनुभूति भी होने लगी थी। लोग अपने रिश्तों को जमीनी कवच जैसा महत्व देने लगे थे। अब सभी बच्चे एक साथ खेलते थे।
गांव में दोनों बच्चे एक साथ बड़े हो गए थे। एक साथ पढ़ाई-लिखाई करते थे और जो समस्याएं आती थीं, उन्हें भी मिलकर हल करते थे। इस गांव का सभी लोगों के बीच एक ख़ुशी का माहौल बन गया था। जहां सभी अपने अपने रिश्तों का महत्व जानते थे।
इस कहानी से हम यह सीखते हैं कि रिश्तों की इकाई कितनी महत्वपूर्ण होती है। जब लोग एक दूसरे के संघर्ष में मदद करते हैं, तब ही समाज में एकता का माहौल बनता है।