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रूहानी उद्देश्यों का महत्त्व हमारी जिंदगी धीरे-धीरे अपने महत्त्वपूर्ण उद्देश्यों

Title: रूहानी उद्देश्यों का महत्त्व

हमारी जिंदगी धीरे-धीरे अपने महत्त्वपूर्ण उद्देश्यों से दूर खिंचती जा रही है। हम व्यस्तताओं में इतने उलझे हुए हैं कि हम अपने आध्यात्मिक उन्नति के लक्ष्यों के बारे में सोचना भी भूल गए हैं। परमात्मा का ज्ञान जीवन में एक समझौता है जो हमें खुशियों के साथ राहत भी देता है। इसलिए, जीवन में सुधार करने के लिए हमारे शब्दों में अर्थ या उद्देश्यों को सामने रखना होगा।

यदि आप अपने दोस्तों व अपने परिवार के साथ आपातकाल के समय पूछे जाए, कि हम अपने उद्देश्य के बारे में क्या जानते हैं, तो इस विषय में अधिकतर लोगों के दिमाग में कोई विचार नहीं होगा। परंतु हमें मानना चाहिए कि सबसे महत्वपूर्ण कदम दूसरों की तुलना में नहीं बल्कि अपने आत्मा की उन्नति की ओर होना चाहिए। उर्दू के महान कवि और चिंतक आलाम इकबाल ने अपनी कविता में कहा है, “शिखवाओ नज़रों से कि ज़िन्दगी कायम है। कल के लिए तुम अदालत में खड़े हो सकते हो, लेकिन आज की तरह तो तुम्हारे सामने केवल जीवन होता है।”

हम जीवन में उद्देश्य के लिए धन, सम्मान और शौक के संग्रह का कोई मान्यता नहीं है। यदि हम एक अर्ध-सच्चे जीवन जीते हैं। तो हम उद्देश्य के लिए जीवन का उत्पादन नहीं कर सकेंगे। हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सम्पूर्ण जीवन के सम्मान के साथ अपनी वित्तीय स्थिति का दंड भी चुकाना होगा।

अपना उद्देश्य जानने के लिए उसे अपने मन में स्थापित करने की जरूरत है। हमें लगातार सोचना होगा और जीवन के प्रति जिज्ञासा और स्वयं को तैयार करने की बात कहते हुए अधिक जानने के लिए समय निकालने की जरूरत होगी।

विभिन्न आध्यात्मिक गुरु ने अलग-अलग रूपों में उद्धरण दिए हैं, जो इस संदेश को सार्थक बनाते हैं।

संत कबीर दास ने अपनी बानी में कहा है, “मानुष देह धरा के माये। तुम अनेक बार न देखो। भला बुरा मिलवान देखो। मन में मत कोई अहंकार लेखो।”

इसका अर्थ है कि मनुष्य के जीवन में भले-बुरे के पल होते हैं, पर उसे अधिक महत्वपूर्ण उद्देश्यों की तलाश होती है। वह अपनी आत्मा की उन्नति के लिए संघर्ष करता है। और, उसे यह समझना चाहिए कि सब कुछ माया है।

अपने उद्देश्य और लक्ष्य के प्रति निष्ठा रखने से हम जीवन को एक नकारात्मक गतिविधि से जगमगाने की बजाय उद्घाटित कर सकते हैं। भगवान बुद्ध ने कहा था, “यदि आप अपने जीवन के लिए उद्देश्य नहीं रखते हैं, तो आप वहाँ नहीं पहुंच सकते जहाँ आप जाना चाहते हैं।”

उद्देश्य के बारे में सोचते वक्त, हमें चाहिए कि हम अपने विभिन्न संघर्षों के बारे में भी सोचें। कुछ लोगों के लिए, लक्ष्य को नहीं हासिल कर पाना हमारे नौकरी या टर्न के दो के अपनी विफलता के लिए बड़ा बढ़ जाता है। इसलिए, उद्देश्य समझाते हुए, हमें समय और उत्साह को नियंत्रित करना चाहिए।

उद्देश्य से मुक्त होकर अपनी आयु के अंतिम दिनों तक आत्म-समर्पण दर्शाने में हमारा गाड़ा काम है। हमें ऊँची उड़ान भरना होगा और दिन-दिन अपने लक्ष्य के पास होते हुए आत्मिक उन्नति के रास्ते के कदम बढ़ाने चाहिए।

महात्मा गांधी ने इस विषय में कहा था, “यदि हम अपनी जिंदगी के लिए उद्देश्य नहीं रखते हैं, तो हम अपनी जिंदगी की तुलना एक खोखली कब्र से कर रहे होते हैं।”

चलो, अपने आत्मा के उद्देश्य और उद्देश्यों का अनुशासन करने में हम सफल हो जाएं। मन और आत्मा की शुद्धि के लिए ध्यान रखें और भगवान के दर्शन करने के लिए स्थिर रहें। यह हमारे सभी जीवन है।

आखिर में, एक महत्वपूर्ण संदेश बखूबी समझाता है। इस जीवन में हम अगले जीवन की तुलना में कुछ भले हो सकते हैं, बाकी हमें एक उद्घाटन करना होगा। यह जीवन तो परिणामों का खेल है, जो हमें हमारे उद्देश्यों के लिए रूढ़िवादी होने से रोकते हैं।

इसलिए, आपको सदा अपने मन को आत्मा के सफल उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह हमारी रूहानी उन्नति के लिए पर्याप्त है। सत्य और अहिंसा के लिए निश्चित रूप से रखा जाना चाहिए।

आत्मोद्धार अपने उद्देश्य को जीताने के आधार पर होता है। हमारी जिंदगी प्रत्येक क्षण का महत्व रखती है। यदि हम बेकार में अपना जिंदगी बिताते हैं, तो हम फिर कभी वापस नहीं लौट सकते। तो, अपने मन में अपने आत्मा के लक्ष्यों को रख लें और उन्हें हासिल करने के लिए सफलता को प्रगट करने में सक्षम हों।

कागा जी

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