‘लाल आँख’ का नया चश्मा: अब चीन तय करेगा हमारी कूटनीति का मेन्यू!

सुनो-सुनो देशवासियों! ‘दि कारवा’ नामक पत्रिका ने एक नया शगूफा छोड़ा है। उनका दावा है कि भारत और चीन के रिश्ते अब पूरी तरह से बीजिंग की शर्तों पर तय हो रहे हैं। अब भला बताइए, यह भी कोई कहने की बात है? हमारे आदरणीय नेताओं की ‘लाल आँखें’ क्या सिर्फ मोतियाबिंद का इलाज कराने के लिए हैं? नहीं साहब, यह तो कूटनीति का वो अलौकिक रूप है जिसे समझने के लिए साधारण बुद्धि नहीं, बल्कि 56-इंच का विशेष चश्मा चाहिए होता है!

लाल आँखें और बीजिंग का डिक्टेशन

‘काक-वाणी’ के मुंडेर से हम इस रिपोर्ट का कड़ा विरोध करते हैं। अरे भाई, अगर चीन हमारी सीमाओं के पास आकर बैठ गया है, तो इसमें हमारी महान आतिथ्य परंपरा ‘अतिथि देवो भव:’ की झलक है। इसे चीन की शर्तें क्यों कहा जाए? चीन अगर कहता है कि फलां जगह गश्त मत करो, तो हम मान जाते हैं—आखिर हमारे सैनिक धूप में थक न जाएँ, इसका ख्याल कौन रखेगा? इसे ‘समर्पण’ कहना सरासर राष्ट्रीय भावना का अपमान है। इसे तो ‘मास्टरस्ट्रोक’ कहते हैं, जिसमें बिना लड़े ही हम पड़ोसी को शांति का पाठ पढ़ा रहे हैं ताकि वह हमारी उदारता देखकर खुद शर्मिंदा हो जाए!

टिकटॉक बैन: 21वीं सदी का महासंग्राम

चीन ने अगर अपनी शर्तें थोपीं, तो हमने भी कौन सा कम बदला लिया! हमने चीन के सबसे विध्वंसक हथियार—टिकटॉक और कुछ चीनी ऐप्स पर डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। अब बताइए, शी जिनपिंग रोए नहीं तो और क्या करें? यह अलग बात है कि हमारे देश का चीन के साथ व्यापार घाटा रोज नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है। हम चीन से सामान मँगवा-मँगवाकर उनके गोदाम खाली कर रहे हैं, ताकि उनकी अर्थव्यवस्था पर सामान बनाने का बोझ बढ़े! इसे कहते हैं आर्थिक युद्ध कला। चीन समझ रहा है कि वह शर्तें तय कर रहा है, जबकि असल में हम उसे ‘खरीद-खरीद कर’ कंगाल कर रहे हैं।

विश्वगुरु की मौन कूटनीति

विदेश मंत्रालय का बयान तो आपने सुना ही होगा—”बातचीत जारी है।” बेशक बातचीत की मेज़ चीन की होती है, मेन्यू चीन का होता है और समय भी बीजिंग तय करता है, लेकिन मेज़ पर रखा पानी तो हमारा होता है ना! इसलिए बेफिक्र रहिए। अगर चीन की शर्तों पर रिश्ते बन रहे हैं, तो इसमें भी हमारी ही दूरदर्शी नीति है। ‘काक-वाणी’ का स्पष्ट मानना है कि जब तक हमारे पास कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस और लाल आँखों वाला चश्मा है, तब तक सीमा पर चाहे जो हो, जीत हमेशा कागज़ों पर हमारी ही मानी जाएगी!


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कागा जी