प्रणाम ज्ञानार्थियों! आपका स्वागत है ‘वाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के प्रातःकालीन सत्र में, जहाँ प्रवेश के लिए किसी परीक्षा की नहीं, बल्कि केवल एक चालू इंटरनेट डेटा पैक और एक क्रियाशील अंगूठे की आवश्यकता होती है। यहाँ हर सुबह सूरज उगने से पहले ज्ञान की ऐसी गंगा बहती है, जिसमें डुबकी लगाकर अच्छे-भले तर्कशील इंसान भी ‘परम ज्ञानी’ होने का भ्रम पाल लेते हैं।
यूनेस्को का एकमात्र काम: भारत को अवॉर्ड बांटना
क्या आपको पता है कि यूनेस्को (UNESCO) के पास पेरिस के मुख्यालय में अब कोई काम नहीं बचा है? जी नहीं, हम मजाक नहीं कर रहे। हमारी यूनिवर्सिटी के पारिवारिक ग्रुप्स के अनुसार, यूनेस्को का एकमात्र काम हर हफ्ते भारत के राष्ट्रगान, राष्ट्रध्वज या फिर किसी बनारसी समोसे को ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करना है। अगर आपके पास भी ऐसा कोई मैसेज आया है, तो बधाई हो! आप एक अंतरराष्ट्रीय अफवाह के सह-साझेदार बन चुके हैं। सच तो यह है कि यूनेस्को वालों को खुद नहीं पता होता कि उन्होंने कब और किसे यह अवॉर्ड दे दिया।
नासा के वैज्ञानिक और फूफा जी का दिव्य ज्ञान
हमारी यूनिवर्सिटी के स्वघोषित वैज्ञानिक इतने प्रतिभावान हैं कि जो खोज नासा (NASA) अरबों डॉलर खर्च करके नहीं कर पाता, वह हमारे फूफा जी सुबह-सुबह बिना ब्रश किए सोफे पर लेटे-लेटे कर लेते हैं। ‘इलायची के छिलके से कोरोना भगाने’ से लेकर ‘नासा द्वारा अंतरिक्ष में शंख की आवाज सुनने’ तक के दावे यहाँ धड़ल्ले से बेचे जाते हैं। इन दावों को पढ़कर नासा के असली वैज्ञानिक भी डिप्रेशन में आकर अपनी डिग्रियां गंगा जी में प्रवाहित करने की सोच रहे होंगे। सच्चाई यह है कि इन वायरल दावों का विज्ञान से उतना ही नाता है, जितना एक शाकाहारी का चिकन बिरयानी से होता है।
11 लोगों को भेजें, वरना अनर्थ हो जाएगा!
इस विश्वविद्यालय की सबसे अचूक परीक्षा होती है ‘इमोशनल ब्लैकमेल’। ‘इस चमत्कारी संदेश को तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक बड़ी खुशखबरी मिलेगी। अनदेखा करने पर मोबाइल ब्लास्ट हो सकता है।’ अरे भाई, अगर सिर्फ फॉरवर्ड करने से भाग्य बदल जाता, तो देश के सारे बेरोजगार युवा दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय सिर्फ वाट्सएप पर अंगूठे घिस रहे होते।
काक-वाणी की कड़वी नसीहत
तो हे ज्ञानवीरों! ‘काक-वाणी’ की कड़वी सच्चाई यही है कि हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती और हर फॉरवर्डेड संदेश सच नहीं होता। अगली बार जब कोई महाज्ञानी आपको चमत्कारी संदेश भेजे, तो अपने दिमाग की बत्ती जलाएं, गूगल बाबा से सच पूछें, और अफवाहों के इस रायते को आगे फैलाने से रोकें। ज्ञान बांटिए, अज्ञान नहीं!