व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का परम ज्ञान: यूनेस्को अवार्ड से लेकर जीपीएस चिप तक का सच

स्वागत है आपका ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में। आज हम बात करेंगे उस अथाह ज्ञान सागर की, जो हर सुबह हमारे फोन की घंटी बजाकर हमारी नींद और चैन दोनों हराम करता है। व्हाट्सएप पर घूम रहे इस ‘परम सत्य’ का फैक्ट चेक करना आज के समय में उतना ही जरूरी हो गया है, जितना चाय में बिस्कुट डुबाकर उसे टूटने से पहले बाहर निकालना।

१. यूनेस्को का ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ अवार्ड

हर तीन-चार महीने में पेरिस में बैठा यूनेस्को (UNESCO) का मुख्यालय अचानक गहरी नींद से जागता है और भारतीय राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित कर देता है। बेचारे यूनेस्को वाले खुद हैरान हैं कि उन्होंने यह अवार्ड कब, किसे और कैसे दे दिया! इस वायरल मैसेज का कड़वा सच यह है कि यूनेस्को के पास ऐसा कोई विभाग ही नहीं है जो देशों के राष्ट्रगान की रैंकिंग तय करे। लेकिन हमारे व्हाट्सएप के फूफाजी इस मैसेज को ११ ग्रुपों में भेजे बिना चैन की सांस नहीं लेते, क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा न करने पर देश खतरे में आ जाएगा।

२. गुलाबी नोट में ‘मंगलयान’ वाली जीपीएस चिप

साल २०१६ में जब २००० रुपये का गुलाबी नोट आया था, तब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के परम वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि इसमें एक नैनो-जीपीएस चिप लगी है। यह चिप जमीन के १२० फीट नीचे से भी सीधे सैटेलाइट को सिग्नल भेज सकती थी। अफवाह इतनी खतरनाक थी कि कुछ लोगों ने तो सचमुच नोटों को फाड़-फाड़कर उसमें से चिप ढूंढने की कोशिश की। सच यह निकला कि नोट में सिर्फ मंगलयान की तस्वीर थी, कोई जीपीएस नहीं। अब तो वह नोट खुद इतिहास बन चुका है, लेकिन व्हाट्सएप के वैज्ञानिकों की वह रिसर्च आज भी डिजिटल म्यूजियम की शोभा बढ़ा रही है।

३. नासा द्वारा खींची गई दिवाली की ‘अद्भुत’ तस्वीर

हर साल दिवाली की अगली सुबह नासा (NASA) के नाम पर एक रंग-बिरंगी तस्वीर वायरल होती है, जिसमें पूरा भारत रोशनी से जगमगाता हुआ दिखता है। इस तस्वीर को देखकर हर भारतीय का सीना चौड़ा हो जाता है। लेकिन सच यह है कि नासा ऐसी कोई रंग-बिरंगी ‘दिवाली स्पेशल’ तस्वीर जारी नहीं करता। वह असल में अलग-अलग समय पर ली गई सैटेलाइट तस्वीरों को मिलाकर बनाया गया एक पुराना थ्री-डी ग्राफिक्स है। पर व्हाट्सएप के ज्ञानियों को कौन समझाए, उन्हें तो अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी से ज्यादा अपनी ‘फॉरवर्ड’ वाली उंगली पर भरोसा है।

निष्कर्ष: फॉरवर्ड करने से पहले दिमाग का इस्तेमाल करें

व्हाट्सएप पर तैरते हुए इस ज्ञान के समंदर में बिना लाइफ जैकेट (यानी गूगल सर्च) के न उतरें। अगली बार जब आपके पास कोई मैसेज आए कि ‘इसे तुरंत १० लोगों को भेजें, शाम तक बड़ी खुशखबरी मिलेगी’, तो कृपया रुकें। सबसे बड़ी खुशखबरी यही होगी कि आपका और आपके दोस्तों का इंटरनेट डेटा और दिमाग, दोनों फालतू के कचरे से बच जाएंगे। सच जानिए, सतर्क रहिए और इस यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री बांटने से बाज आइए!

कागा जी