सुबह की पहली किरण के साथ जब आपके फोन की घंटी बजती है, तो वह किसी प्रियजन का प्रेम संदेश नहीं, बल्कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के किसी ‘मानद प्रोफेसर’ का ज्ञानोपदेश होता है। “इस संदेश को 11 लोगों को भेजें, शाम तक शुभ समाचार मिलेगा” से शुरू हुआ यह सफर अब ‘नासा ने सूरज की आवाज में ‘ॐ’ की ध्वनि सुनी’ तक पहुंच चुका है। ‘काक-वाणी’ के इस विशेष अंक में आज हम व्हाट्सएप के इन परम ज्ञानियों और उनके वायरल दावों की कड़वी सच्चाई का पर्दाफाश करेंगे।
यूनेस्को का वार्षिक त्योहार: सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान का तमगा
साल में कम से कम चार बार, विशेष रूप से 15 अगस्त और 26 जनवरी को, यूनेस्को (UNESCO) अचानक नींद से जागता है और भारतीय राष्ट्रगान को ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित कर देता है। बेचारे यूनेस्को के अधिकारियों को खुद नहीं पता कि उन्होंने कब और किस मीटिंग में यह पुरस्कार बांट दिया! सच तो यह है कि यूनेस्को के पास ऐसी कोई श्रेणी ही नहीं है। लेकिन हमारे पारिवारिक ग्रुप्स के ‘राष्ट्रभक्त एडमिन’ को इससे क्या? उन्हें तो बस ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ का तमगा हासिल करना है।
विज्ञान को घुटनों पर लाता व्हाट्सएप ज्ञान
आइंस्टीन और न्यूटन ने अपनी पूरी जिंदगी जिन सिद्धांतों को खोजने में लगा दी, हमारे व्हाट्सएप वाले फूफाजी उसे एक ‘फॉरवर्ड’ में खारिज कर देते हैं। हालिया दावा देखिए- “कच्चे दूध में हल्दी और थोड़ा सा शुद्ध गोबर मिलाकर पीने से कोरोना वायरस तो क्या, यमराज भी रास्ता बदल लेंगे।” ऐसे दावों को पढ़कर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान खुद को आईसीयू में महसूस करने लगता है। इसके अलावा, नासा (NASA) के पास जैसे कोई और काम नहीं है, वे दिन-रात सिर्फ हमारे घरेलू नुस्खों की वैज्ञानिकता को प्रमाणित करने के लिए सैटेलाइट लॉन्च करते रहते हैं।
चमत्कारी घरेलू नुस्खे: कैंसर से लेकर मोतियाबिंद तक का इलाज
व्हाट्सएप के ‘स्वयंभू डॉक्टरों’ के अनुसार, कैंसर जैसी घातक बीमारी का इलाज बड़े अस्पतालों में नहीं, बल्कि आपकी रसोई में रखी अदरक और लहसुन की कली में छिपा है। “गर्म पानी के साथ नींबू निचोड़कर पीने से कीमोथेरेपी से दस हजार गुना ज्यादा फायदा होता है।” इस दावे को पढ़कर दुनिया भर के कैंसर विशेषज्ञ अपनी डिग्रियां गंगा में बहाने की सोच रहे हैं। यह बिना लाइसेंस वाले डॉक्टर सिर्फ एक फॉरवर्ड से लाखों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
सच्चाई की कड़वी घूंट: फॉरवर्ड बटन दबाने से पहले सोचें
इस फेक न्यूज की मंडी में सबसे बड़ा हथियार है ‘भावनाएं’। जैसे ही किसी संदेश के नीचे “अगर सच्चे देशभक्त हो तो शेयर करो” या “अपनी मां से प्यार करते हो तो फैला दो” लिखा होता है, हमारे अंगूठे खुद-ब-खुद फॉरवर्ड बटन पर चले जाते हैं। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के इन दावों की कड़वी सच्चाई यह है कि यह आपके दिमाग की सोचने की क्षमता को सुन्न कर रहे हैं। अगली बार जब कोई चमत्कारी दावा आपके इनबॉक्स में आए, तो पहले अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें, न कि केवल अंगूठे का। याद रखें, हर पीली चीज सोना नहीं होती, और हर व्हाट्सएप मैसेज सच नहीं होता!