प्रणाम पाठकों! स्वागत है आपका काक-वाणी के सबसे लोकप्रिय स्तंभ ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में। आज हम बात करेंगे उस वैश्विक महाज्ञान की, जो किसी ऑक्सफोर्ड या हार्वर्ड से नहीं, बल्कि आपके फूफा जी के ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ वाले संदेशों से निकलता है। इस अद्भुत विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां बिना किसी परीक्षा और डिग्री के, हर दूसरा व्यक्ति रातों-रात न्यूक्लियर साइंटिस्ट, इतिहासकार और कार्डियोलॉजिस्ट बन जाता है। आइए करते हैं इस हफ्ते के शीर्ष दावों का पोस्टमार्टम!
यूनेस्को की विशेष कृपा और नासा की दूरबीन
दुनिया में जब भी कोई गौरवशाली क्षण आता है, यूनेस्को सबसे पहले हमारे व्हाट्सएप ग्रुपों को टेलीग्राम भेजता है। पिछले पांच सालों से हमारा राष्ट्रगान हर हफ्ते ‘यूनेस्को द्वारा सर्वश्रेष्ठ घोषित’ हो रहा है। बेचारे यूनेस्को के अधिकारी खुद गूगल पर ढूंढ रहे हैं कि उन्होंने यह घोषणा कब और किस नशे में की थी! वहीं दूसरी तरफ, नासा के वैज्ञानिकों के पास कोई और काम नहीं बचा है; वे हर दिवाली पर अंतरिक्ष में केवल भारत की जगमगाती तस्वीर खींचने के लिए अपना दूरबीन सेट करके बैठते हैं। इस WhatsApp Viral Fact Check का कड़वा सच यह है कि नासा की वो रंग-बिरंगी तस्वीरें दरअसल केवल एक थ्री-डी ग्राफिक डिजाइनिंग का कमाल होती हैं, जिसे देखकर हमारे मोहल्ले के शर्मा जी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
इलाज ऐसा कि खुद धन्वंतरी भी शर्मा जाएं
इस विश्वविद्यालय की मेडिकल विंग तो इतनी उन्नत है कि यहां कैंसर से लेकर कोरोना तक का इलाज मात्र एक कप गर्म पानी में नींबू निचोड़कर और दो लौंग चबाकर किया जा सकता है। हमारे चचा जान सुबह-सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ के फूलों के साथ जो काढ़े की रेसिपी भेजते हैं, उसे पीकर इंसान अमर तो नहीं होता, लेकिन हां, पेट के अल्सर का टिकट जरूर कटवा लेता है। बिना किसी क्लिनिकल ट्रायल के, केवल ‘इसे ग्रुप में भेजें ताकि किसी गरीब की जान बच सके’ लिखकर जो नुस्खे बांटे जाते हैं, वे चिकित्सा विज्ञान का खुला मखौल उड़ाते हैं।
सोचो मत, बस अंगूठा चलाओ!
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का एक ही मूलमंत्र है—’तथ्यों को गोली मारो, बस फॉरवर्ड का बटन दबाओ’। जैसे ही उंगली फॉरवर्ड बटन पर जाती है, सेंडर का आईक्यू लेवल अचानक से ‘विशालकाय’ हो जाता है। अगली बार जब आपके ग्रुप में ‘जीपीएस चिप वाले गुलाबी नोट’ या ‘प्लास्टिक की पत्तागोभी’ की खबर आए, तो अपनी कीमती उंगली को थोड़ा आराम दीजिए। थोड़ा गूगल बाबा की शरण में जाइए, क्योंकि असली दुनिया व्हाट्सएप के चमकीले ‘फॉरवर्डेड’ ठप्पे से बहुत अलग, तार्किक और वैज्ञानिक है। तब तक के लिए, सचेत रहिए और बिना सोचे-समझे ज्ञान बांटने वाले ज्ञानवीरों से उचित दूरी बनाए रखिए!