व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी की नई खोज: ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाओ और सच पाओ!

नमस्कार दर्शकों! ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। हमारे देश के ‘फॉरवर्ड शूरवीरों’ के लिए एक बेहद राहत भरी खबर आई है। अब आपको गूगल पर जाकर किसी खबर का सच या झूठ पता लगाने की बिल्कुल मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के रिसर्च डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया का नया और आधुनिक ‘फैक्ट-चेक’ सिस्टम लॉन्च कर दिया है।

अगर 10 लोगों ने भेजा, तो खबर ‘ब्रह्म सत्य’ है

नए फैक्ट-चेक नियम के अनुसार, यदि कोई मैसेज आपके पास एक ही दिन में 5 से ज्यादा फैमिली ग्रुप्स में आता है, तो उसकी सत्यता जांचने की कोई आवश्यकता नहीं है। उसे बिना पढ़े तुरंत ‘100% प्रामाणिक सच’ मान लिया जाए। शोधकर्ताओं का मानना है कि जो खबर सुबह शर्मा जी ने भेजी, दोपहर में वर्मा जी ने और शाम को आपके फूफा जी ने, वह गलत हो ही नहीं सकती। फूफा जी की नाराजगी और मैसेज की प्रामाणिकता पर सवाल उठाना, दोनों ही खतरनाक काम हैं!

‘नासा’ और ‘यूनेस्को’ का ऑटो-सर्टिफिकेट

सोशल मीडिया के इस नए फैक्ट-चेकिंग मॉडल में अब किसी स्वतंत्र एजेंसी की जरूरत नहीं बची है। जिस भी मैसेज के अंत में “नासा ने माना है” या “यूनेस्को ने सर्वश्रेष्ठ घोषित किया है” लिखा हो, उस पर आंख बंद करके भरोसा करना अनिवार्य कर दिया गया है। उदाहरण के लिए, अगर किसी मैसेज में लिखा है कि ‘रात को तकिए के नीचे लहसुन रखने से मंगल ग्रह शांत रहता है’, तो समझ लीजिए कि नासा के वैज्ञानिकों ने खुद मंगल ग्रह पर जाकर इस रिसर्च की पुष्टि की है।

‘फॉरवर्ड’ बटन दबाना ही असली साइबर सुरक्षा

फैक्ट-चेक की नई गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि यदि कोई वायरल पोस्ट आपको 11 लोगों को न भेजने पर ‘अशुभ समाचार’ की धमकी दे, तो उसे तुरंत फॉरवर्ड करें। तर्क, विज्ञान और सामान्य ज्ञान को ताक पर रखकर, केवल ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाना ही इस देश के हर ‘व्हाट्सऐप ग्रेजुएट’ का परम कर्तव्य है। सूचना जितनी अजीब होगी, उसके सच होने की संभावना उतनी ही ज्यादा मानी जाएगी।

काक-वाणी का विशेष सुझाव

अंत में, ‘काक-वाणी’ अपने प्रिय पाठकों को यही सलाह देती है कि दिमाग एक बहुत ही कीमती चीज है, इसे व्हाट्सऐप की खबरों पर खर्च करके बेकार न करें। अगर कल को कोई आपसे कहे कि ‘नींबू-मिर्च’ से फोन की बैटरी 200% चार्ज होती है, तो बहस न करें, बस मुस्कुराएं और कहें – “जय व्हाट्सऐप देव!”

कागा जी