संयुक्त राष्ट्र की मुफ़्त सलाह: थोड़ा प्यार से लाठी चलाइए साहब!

दुनिया भर में जारी बड़े-बड़े युद्धों को रुकवाने में पूरी तरह नाकाम रहा संयुक्त राष्ट्र (UN) एक बार फिर अपनी असली उपयोगिता साबित करने के मैदान में उतर आया है। रॉयटर्स के हवाले से खबर आई है कि यूएन के परम ज्ञानी विशेषज्ञों ने भारतीय अधिकारियों से कातर भाव से गुजारिश की है कि भाईसाहब, प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए इस ‘अत्यधिक बल’ का प्रयोग बंद कीजिए। अब काक-वाणी भला इस ऐतिहासिक, अमूल्य और बिन-मांगे ज्ञान पर चुप कैसे रह सकती है?

विश्व शांति के स्वयंभू ठेकेदारों की नई चिंता

वाह! क्या अद्भुत दूरदर्शिता है। जब दुनिया के बाकी हिस्सों में मिसाइलें दागी जा रही होती हैं और निर्दोष लोग गायब हो रहे होते हैं, तब संयुक्त राष्ट्र के आलीशान दफ्तरों में गहरा सन्नाटा पसरा रहता है। लेकिन जैसे ही भारत में किसी उग्र प्रदर्शन को रोकने के लिए वाटर कैनन की बौछार होती है या पुलिस लाठी चमकाती है, जिनेवा में बैठे एसी-विशेषज्ञों की ग्रीन-टी छलक जाती है। उन्हें अचानक याद आ जाता है कि धरती पर मानवाधिकार नाम की भी कोई चिड़िया रहती है!

हमारे प्यारे देश में तो वैसे भी लाठी को ‘अनुशासन की छड़ी’ माना जाता है। लेकिन सात समुंदर पार बैठे इन साहबों को कौन समझाए कि यहाँ जब तक पुलिस दो-चार लाठियाँ चटखा न दे, तब तक तो प्रदर्शनकारियों को भी लगता ही नहीं कि उनका विरोध दर्ज हुआ है। यह तो हमारा आपस का प्रेम-प्रसंग और सांस्कृतिक लेन-देन है, जिसे यूएन वाले गलती से ‘अत्यधिक बल’ समझ बैठे हैं।

जिनेवा के एसी कमरों से मिला मुफ़्त का ज्ञान

यूएन के इन दूरदर्शी विशेषज्ञों का इरादा शायद यह है कि उपद्रवियों के पत्थर फेंकने पर पुलिस को तुरंत गुलाब का फूल लेकर हाथ जोड़ लेना चाहिए। अगर कोई भीड़ सरकारी बस जलाने लगे, तो पुलिस वाले को झट से पूछना चाहिए, “जनाब, पेट्रोल हम छिड़क दें या आप खुद मेहनत करेंगे?”

नरेंद्र मोदी सरकार को चाहिए कि वह तुरंत इन ज्ञानवर्धक यूएन विशेषज्ञों को भारत का वीजा दे और उन्हें सीधे प्रदर्शन वाली जगहों पर तैनात कर दे। फिर काक-वाणी भी देखना चाहेगी कि ये अंतर्राष्ट्रीय ज्ञानी अपनी मीठी बातों और भाषणों से उपद्रवियों का दिल कैसे पिघलाते हैं।

खैर, काक-वाणी तो इन विदेशी सलाहकारों को बस यही मुफ्त की नसीहत देगी कि अपनी सलाह की दुकान वहाँ चलाएँ जहाँ सचमुच गोलियाँ चल रही हैं। भारत के आंतरिक मामलों पर इतना तरस मत खाइए, वरना हमारी पुलिस आपको भी ‘अति-आतिथ्य’ के लिए थाने बुला सकती है!


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कागा जी