संयुक्त राष्ट्र की ‘मुफ्त सलाह’ और हमारी लट्ठमार जलपरी!

न्यूयॉर्क की वातानुकूलित इमारतों में बैठकर कॉफ़ी की चुस्कियां लेते संयुक्त राष्ट्र (UN) के महामहिम विशेषज्ञों को अचानक भारत की बहुत चिंता सताने लगी है। रॉयटर्स की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, इन ज्ञानी विशेषज्ञों ने भारतीय अधिकारियों से गड़गड़ाकर गुहार लगाई है कि वे प्रदर्शनों को रोकने के लिए ‘अत्यधिक बल’ का प्रयोग बंद करें। अब कोई इन विदेशी बाबुओं को समझाए कि जिसे वे ‘अत्यधिक बल’ कह रहे हैं, हमारे यहाँ उसे ‘अनुशासन की घुट्टी’ और ‘मुफ़्त स्वास्थ्य सेवा’ कहा जाता है!

‘लाठी’ नहीं, यह तो ‘अहिंसात्मक मालिश’ है!

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों को शायद भारतीय पुलिस के इस ‘मानवतावादी’ दृष्टिकोण का ज़रा भी अंदाजा नहीं है। कड़ाके की ठंड में जो वाटर कैनन (पानी की बौछारें) चलाई जाती हैं, वह दरअसल प्रदर्शनकारियों के लिए सरकार की तरफ से मुफ़्त स्नान योजना है। और आंसू गैस के गोले? अरे साहब, वह तो आँखों की रोशनी बढ़ाने वाला मुफ़्त आयुर्वेदिक धुआं है, जिसे बिना किसी डॉक्टर की पर्ची के जनता में बाँटा जाता है। जिसे विदेशी मीडिया ‘लाठीचार्ज’ कहकर शोर मचाता है, वह हमारी पुलिस द्वारा देश के भटके हुए युवाओं की रीढ़ की हड्डी सीधी करने वाली एक प्राचीन ‘फिजियोथेरेपी’ तकनीक है। इसमें भला ‘अत्यधिक बल’ कहाँ से आ गया?

संयुक्त राष्ट्र की ‘चिंता एक्सप्रेस’ और भारतीय लोकतंत्र

जब-जब भारत में कोई सड़क गरम होती है, संयुक्त राष्ट्र की ‘चिंता एक्सप्रेस’ बिना टिकट ही न्यूयॉर्क से रवाना हो जाती है। नरेंद्र मोदी सरकार और हमारे गृह मंत्रालय का इस विषय पर कूटनीतिक रवैया हमेशा से स्पष्ट रहा है—’ज्ञान देना बंद करो और अपना काम करो!’ जब दुनिया के नक्शे पर आधा दर्जन देश आपस में रॉकेट-रॉकेट खेल रहे हैं और लाखों टन बारूद उड़ा रहे हैं, तब संयुक्त राष्ट्र के पास भारत की लाठियों का वजन नापने का पूरा समय है। यह अपने आप में एक अद्भुत विश्व-शांति का मॉडल है।

वैसे, अगर संयुक्त राष्ट्र के इन कागज-काले करने वाले विशेषज्ञों को वाकई भारतीय लोकतंत्र की जमीनी हकीकत का अनुभव लेना है, तो ‘काक-वाणी’ उन्हें सादर आमंत्रित करती है। वे आएं और किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैनर लेकर बैठें। फिर जब हमारी मित्रवत पुलिस उनके आतिथ्य-सत्कार में ‘अत्यधिक बल’ का प्रयोग करेगी, तब उन्हें समझ आएगा कि ‘काक-वाणी’ का व्यंग्य कितना सटीक था। तब तक के लिए, संयुक्त राष्ट्र जी अपनी चिंता का लिफ़ाफ़ा अपने पास ही रखें, यहाँ लाठी और लोकतंत्र का रिश्ता बहुत पुराना और गहरा है!


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कागा जी