सिर्फ बॉलीवुड ही सिनेमा नहीं है बाबू! देवकन्या ठाकुर ने खोली फिल्म इंडस्ट्री की पोल

जब भी हमारे देश में ‘सिनेमा’ शब्द गूंजता है, तो सबसे पहले लोगों के दिमाग में क्या आता है? स्विट्जरलैंड की वादियों में नाचते हीरो-हीरोइन, तीन घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा और ढेर सारा मसाला! यानी सीधे शब्दों में कहें तो ‘बॉलीवुड’। लेकिन ठहरिए जनाब! क्या सच में सिनेमा का मतलब सिर्फ बॉलीवुड ही है? इस बात पर अब एक नई बहस छिड़ गई है, और यह चिंगारी सुलगाई है जानी-मानी फिल्ममेकर और राइटर देवकन्या ठाकुर ने।

‘द ट्रिब्यून’ को दिए इंटरव्यू में देवकन्या का बड़ा धमाका

हाल ही में ‘द ट्रिब्यून’ को दिए एक इंटरव्यू में देवकन्या ठाकुर ने एक ऐसी कड़वी सच्चाई बयां की है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “सिर्फ बॉलीवुड ही सिनेमा नहीं है।” देवकन्या का मानना है कि भारत में सिनेमा की परिभाषा को बेहद सीमित कर दिया गया है। जब तक हम क्षेत्रीय सिनेमा (Regional Cinema) को मुख्यधारा में जगह नहीं देंगे, तब तक हम असली भारतीय सिनेमा की आत्मा से कोसों दूर रहेंगे।

काक-वाणी का नजरिया: क्या सच में बॉलीवुड ने सबको दबा रखा है?

अब बात करते हैं असली मुद्दे की। अक्सर देखा गया है कि क्षेत्रीय भाषाओं में बनी बेहतरीन और अवॉर्ड-विनिंग फिल्मों को सिनेमाघरों में स्क्रीन्स तक नसीब नहीं होतीं, जबकि बॉलीवुड की बिना सिर-पैर वाली रीमेक फिल्में करोड़ों कमा ले जाती हैं। देवकन्या ठाकुर ने इसी दर्द को छुआ है। हिमाचल प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली देवकन्या खुद पहाड़ी और क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं। उनका कहना है कि भारत की असली कहानियां तो गांवों, छोटे शहरों और स्थानीय संस्कृतियों में छिपी हैं, जिन्हें बॉलीवुड अक्सर अनदेखा कर देता है।

कंटेंट किंग है, लेकिन क्या दर्शक तैयार हैं?

देवकन्या ठाकुर की यह बात आज के दौर में बिल्कुल सटीक बैठती है। आज भले ही साउथ की फिल्मों ने बॉलीवुड का घमंड थोड़ा कम किया हो, लेकिन छोटे राज्यों के क्षेत्रीय सिनेमा को आज भी पहचान के लिए तरसना पड़ता है। देवकन्या कहती हैं कि सिनेमा एक ऐसा माध्यम है जो समाज का आईना होना चाहिए, न कि सिर्फ करोड़ों रुपये कमाने की मशीन।

तो दोस्तों, ‘काक-वाणी’ का तो यही मानना है कि अगली बार जब आप फिल्म देखने का प्लान बनाएं, तो सिर्फ बड़े बैनर और बड़े स्टार्स के पीछे न भागें। कभी किसी क्षेत्रीय फिल्म को भी मौका देकर देखिए, क्योंकि असली कला बड़े बजट की मोहताज नहीं होती!


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कागा जी