2029 का दूल्हा कौन? इंडिया गठबंधन के अनसुलझे ख्वाब और थलपति विजय की फिल्मी ‘एंट्री’

अभी 2024 की सरकार ने ठीक से अंगड़ाई भी नहीं ली है, बजट के वादे कागजों से बाहर भी नहीं निकले हैं, लेकिन हमारे दूरदर्शी राजनेताओं ने 2029 की बिसात बिछानी शुरू कर दी है। जी हां, इसे ही कहते हैं असली ‘विजनरी’ होना! ‘काक-वाणी’ के इस विशेष अंक में आपका स्वागत है, जहां हम चर्चा करेंगे उस महान महासंग्राम की, जो अभी सिर्फ राजनेताओं के दिवास्वप्न में ही घटित हो रहा है। मुद्दा है—2029 में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा?

इंडिया गठबंधन: एक अनार, सौ बीमार और हजार प्रधानमंत्री!

इंडिया गठबंधन (INDIA Block) की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यहां हर पार्टी के पास कम से कम एक प्रधानमंत्री उम्मीदवार जरूर है। अभी से 2029 के ‘दूल्हे’ की तलाश में तलवारें खिंचने लगी हैं। कांग्रेस के अपने लाडले राहुल गांधी हैं, तो उधर क्षेत्रीय क्षत्रपों के दिल में भी ‘दिल्ली अभी दूर नहीं’ वाले अरमान मचल रहे हैं। गठबंधन का सीधा नियम है—चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री पद का सपना अलग-अलग देखेंगे। यह वैसी ही बात है जैसे शादी का टेंट लगाने से पहले ही दूल्हे के फूफा और मौसा आपस में लड़ पड़ें कि विदाई की गाड़ी में आगे कौन बैठेगा!

थलपति विजय की ‘सिनेमैटिक’ एंट्री और तमिलनाडु का तड़का

इधर दिल्ली वाले आपस में सुलझ ही रहे थे कि सुदूर दक्षिण से तमिल सिनेमा के महानायक ‘थलपति’ विजय अपनी नई नवेली पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) के साथ कूद पड़े। तमिलनाडु की राजनीति का वैसे भी इतिहास रहा है—थियेटर की स्क्रीन से सीधे विधानसभा की कुर्सी तक का सफर। विजय को शायद लगता है कि जैसे फिल्मों में वे अकेले ही सौ गुंडों को धूल चटा देते हैं, वैसे ही 2029 की राजनीति में भी एक ही ‘फाइट सीन’ में दिल्ली फतह कर लेंगे। उनकी इस एंट्री से डीएमके और एआईएडीएमके के नेताओं का ब्लड प्रेशर बढ़ गया है। उन्हें डर है कि कहीं उनका पॉपकॉर्न कोई और न खा जाए।

सपना देखना अच्छी बात है, पर जरा जमीन भी देख लो!

कुल मिलाकर, 2029 का यह ट्रेलर बड़ा ही मनोरंजक है। देश की जनता अभी 2024 की महंगाई और बेरोजगारी के डेली सोप से जूझ रही है, और हमारे नेताजी लोग पांच साल बाद रिलीज होने वाली फिल्म की एडवांस बुकिंग की लाइन में लगे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इंडिया गठबंधन का यह कुनबा तब तक एकजुट रहता है या ‘इंटरमिशन’ से पहले ही बिखर जाता है। तब तक के लिए, काक-वाणी का यही संदेश है: सपने देखते रहिए, क्योंकि सपनों पर अभी जीएसटी नहीं लगा है!


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कागा जी