5 दशक, 5 भाषाएं और 3 पीढ़ियां: क्यों राधिका सरथकुमार जैसा कोई दूसरा हो ही नहीं सकता!

बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की दुनिया में सितारे आते हैं, चमकते हैं और वक्त के साथ फीके पड़ जाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी फनकार होते हैं जो वक्त के तराजू पर हर बार खरे उतरते हैं। हम बात कर रहे हैं सदाबहार और बेमिसाल राधिका सरथकुमार की! ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की हालिया रिपोर्ट ने भी इस बात पर मुहर लगा दी है कि राधिका सरथकुमार भारतीय सिनेमा की वो धरोहर हैं, जिनका कोई विकल्प यानी रिप्लेसमेंट हो ही नहीं सकता। चलिए, काक-वाणी के इस खास सेगमेंट में जानते हैं कि आखिर क्यों राधिका इतनी स्पेशल हैं।

तीन पीढ़ियों की गवाह और पांच भाषाओं पर राज

जरा सोचिए, कोई कलाकार पांच दशकों यानी पूरे 50 साल तक कैमरे के सामने डटा रहे और उसकी चमक रत्ती भर भी कम न हो! राधिका सरथकुमार ने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी सिनेमा में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। उन्होंने रजनीकांत, कमल हासन, चिरंजीवी और ममूटी जैसे महानायकों के साथ मुख्य अभिनेत्री के रूप में काम किया, और आज की पीढ़ी के नए कलाकारों के साथ भी उतनी ही सहजता से स्क्रीन शेयर कर रही हैं। तीन पीढ़ियों के साथ लगातार काम करना और हर पीढ़ी के दर्शकों के दिलों में जगह बनाना कोई मामूली बात नहीं है।

‘नसीब अपना अपना’ की चंदो और टीवी की क्वीन

हिंदी दर्शकों के लिए राधिका का नाम आते ही फिल्म ‘नसीब अपना अपना’ की वो चुलबुली और अनोखी ‘चंदो’ याद आ जाती है, जिसका हेयरस्टाइल और मासूमियत आज भी सोशल मीडिया मीम्स में राज करती है। राधिका सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहीं। जब उन्होंने महसूस किया कि बड़े पर्दे पर उनके स्तर के मजबूत किरदार कम हो रहे हैं, तो उन्होंने टेलीविजन का रुख किया। उनका शो ‘चिठ्ठी’ दक्षिण भारत में इतना लोकप्रिय हुआ कि प्रसारण के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था। वह सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि एक सफल प्रोड्यूसर और आंत्रप्रेन्योर भी हैं।

क्यों नहीं लिया जा सकता राधिका का स्थान?

आज के दौर में जब अभिनेत्रियां एक खास उम्र के बाद साइडलाइन कर दी जाती हैं, तब राधिका सरथकुमार एक दमदार मिसाल बनकर खड़ी हैं। उनकी कड़क डायलॉग डिलीवरी, जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस और हर तरह के किरदारों में ढल जाने की क्षमता बेजोड़ है। वह कल भी सिनेमा की क्वीन थीं, आज भी बॉस लेडी हैं और आने वाले वक्त में भी उनके रिकॉर्ड्स को तोड़ पाना नामुमकिन होगा। काक-वाणी का सलाम इस बेमिसाल अदाकारा को, जिन्होंने साबित किया कि असली स्टारडम कभी फीका नहीं पड़ता!


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कागा जी