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कर्म का फल एक गांव में राम नाम का

Title: कर्म का फल

एक गांव में राम नाम का एक जवान रहता था। वह बहुत ही सूझ बुझ वाला और अनुशासित था। वह आगे बढ़ना चाहता था और इसके लिए वह अपनी पढ़ाई पूरी करता रहता था।

राम ने गाँव से दूर एक नगर में काम करने का निर्णय किया था। उसकी मेहनत और संघर्ष का परिणाम यह होता है कि वह नगर के सबसे सम्मानित लोगों में से एक हो गया। उसने अपनी पूरी मेहनत द्वारा कुछ साल में नगर का एक बड़ा उद्योगपति बन लिया।

परन्तु, राम ने नहीं देखा था कि उसकी धूप में जो सफलता थी उसकी छाया में उसको नहीं था। वह अपने माँ, बहन और पिता को भूल गया था। परिवार के साथ समय बिताने का उसने कभी मौका नहीं दिया था।

एक दिन, राम को एक समाचार ने आक्रोशित कर दिया। उसे समाचार में बताया गया कि उसका पिता बीमार हो गया है। वह अपने पिता के दर्द की समस्या को कम करने के लिए वेबसाइट के माध्यम से दवा खरीदने की कोशिश करने लगा। परंतु, उसकी धन व्यय इससे तेज बढ़ता गया।

इस तरह, वह धन को इतना महत्व देने लगा कि वह अपने परिवार को तकलीफ में रखने के साथ-साथ अपने कर्म का भी नतीजा झेलता रहा था। उसने समझा नहीं कि धन से ज्यादा महत्वपूर्ण चीजें होती हैं।

कुछ दिन बाद, एक गंभीर दिव्य संदेश ने उसे ऊपर से घिर लिया कि उसका पिता जी शम्भुनाथ का जाना। वह स्तब्ध रेह गया और उसका अनुभव उसे कहता है कि कर्म का फल कभी भी मिल सकता है।

वह अपने अविनय की जद से दूर होना चाहता था। उसने अपने जन्मदिन के दिन परिवार से माफी मांगते हुए अपनी गलतियों को माफ करवा लिया। वह धन के लिए और नहीं अपने कर्म के लिए काम करता था।

कठिन परस्तिशी के बाद, उसने अपनी संख्या आसानी से पा ली। वह चमत्कारी रूप से अब अधिक धन जमा कर रहा है लेकिन अपने कर्म के कामयाब होने पर ही उसे सफलता मिली थी।

यह कहानी हमें यह बताती है कि जब तक हम अपने कर्म की ओर नहीं देखते हैं तब तक हम असफल हो जाते हैं। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि दूसरों की मदद करना और अपने परिवार से वक़्त बिताना भी अधिक महत्वपूर्ण होता है।

कागा जी

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