आखिरकार, देश के सबसे बड़े ‘मनोरंजन थियेटर’ यानी हमारी संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया। बाहर इंद्रदेव ने अपनी कृपा बरसाई या नहीं, यह तो मौसम विभाग जाने, लेकिन संसद के भीतर विरोध, हंगामे और ‘वॉकआउट’ की ऐसी मूसलाधार बारिश हुई कि लोकतंत्र पूरी तरह भीग कर तरबतर हो गया। ‘काक-वाणी’ के इस विशेष बुलेटिन में हम अपने उन तमाम कर्मठ सांसदों को कोटि-कोटि नमन करते हैं, जिन्होंने पिछले कुछ हफ्तों में अपने फेफड़ों की क्षमता का जो प्रदर्शन किया है, उसके सामने तो ओलंपिक के एथलीट भी पानी मांग लें।
कुछ अज्ञानी और नकारात्मक सोच वाले लोग कह रहे हैं कि इस सत्र में कोई खास काम नहीं हुआ। अरे भाई, आपके लिए काम की परिभाषा क्या है? क्या दिन-रात एक करके तख्तियां लहराना कोई छोटा काम है? क्या वेल (well) तक दौड़ लगाने में कैलोरी बर्न नहीं होती? हमारे माननीय सांसदों ने जिस तरह सुर-ताल मिलाकर ‘हाय-हाय’ का राग अलापा है, उसे देखकर तो यही लगता है कि भारतीय संसद को जल्द ही ‘बेस्ट ड्रामा स्कूल’ का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल जाना चाहिए।
लोकतंत्र की खूबसूरती तो देखिए! जब पूरा सदन शोरगुल और नारेबाजी के ‘म्यूजिक कॉन्सर्ट’ में तब्दील हो चुका था, ठीक उसी सुरमई माहौल के बीच, सरकार ने कई महत्वपूर्ण बिल ऐसे फटाफट पास करा लिए, जैसे कोई मां अपने रोते हुए बच्चे के मुंह में चुपके से कड़वी दवा ठूंस देती है। न चर्चा का झंझट, न विपक्ष के तीखे सवालों का डर। इसे कहते हैं ‘स्मार्ट वर्क’! विपक्ष चिल्लाने का अपना कर्तव्य निभाता रहा, और सत्ता पक्ष बिल पास कराने का। दोनों अपने-अपने काम में सफल रहे। रही बात जनता की, तो वह तो बेचारी हमेशा की तरह ‘मूक दर्शक’ दीर्घा में बैठकर तालियां बजाने के लिए ही बनी है।
इस पूरे ड्रामे में सबसे दयनीय स्थिति लोकसभा अध्यक्ष और सभापति महोदय की रही। पूरे सत्र के दौरान उनके ‘शांत हो जाइए, बैठ जाइए’ के मंत्र को सांसदों ने वैसे ही अनसुना किया, जैसे बच्चे मम्मी की ‘होमवर्क कर लो’ वाली डांट को करते हैं।
अब जब यह तूफान थम गया है, तो हमारे माननीय सांसदों के गले और फेफड़ों को थोड़ा आराम मिलेगा। ‘काक-वाणी’ की मुफ़्त सलाह है कि वे अगले कुछ दिन गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करें, क्योंकि कुछ ही महीनों में शीतकालीन सत्र भी आने वाला है और देश को ‘चिल्लाने’ के अगले चरण के लिए उनकी आवाज़ की सख्त ज़रूरत होगी। तब तक के लिए, लोकतंत्र को आराम करने दीजिए!
संदर्भ मुख्य समाचार: India news: Parliament ends turbulent monsoon session – DW.com