भारत में उच्च शिक्षा के स्तर को लेकर अक्सर चिंता जताई जाती है, लेकिन हमारे पास एक ऐसा विश्वविद्यालय है जो चौबीसों घंटे, बिना किसी फीस के, देश के करोड़ों नागरिकों को ‘परम ज्ञानी’ बना रहा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं विश्वप्रसिद्ध ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ की। यहाँ दाखिले के लिए किसी प्रवेश परीक्षा या योग्यता की आवश्यकता नहीं होती, बस आपके पास एक सस्ता स्मार्टफोन, इंटरनेट पैक और अंगूठे में ‘फॉरवर्ड’ करने की असीम शक्ति होनी चाहिए।
यूनेस्को का पसंदीदा और नासा द्वारा प्रमाणित ज्ञान
इस विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम इतने समृद्ध हैं कि खुद यूनेस्को (UNESCO) भी हर हफ्ते भारत के राष्ट्रगान को ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित करने के लिए मजबूर हो जाता है। इतना ही नहीं, नासा (NASA) के वैज्ञानिक भी हर दिवाली भारत की चमचमाती तस्वीर अंतरिक्ष से खींचकर सबसे पहले व्हाट्सएप के ‘फैमिली ग्रुप’ में ही लीक करते हैं। अगर आप इन खबरों पर शक करते हैं, तो आप इस विश्वविद्यालय के सबसे बड़े विद्रोही घोषित किए जा सकते हैं। आखिर “फॉरवर्डेड एज़ रिसीव्ड” (Forwarded as received) से बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है?
विज्ञान और चिकित्सा जगत की ऐसी-तैसी
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के चिकित्सा विभाग का ज्ञान तो डब्लूएचओ (WHO) के डॉक्टरों को भी कोमा में भेज सकता है। यहाँ कैंसर का इलाज सुबह-सुबह गर्म पानी पीने से और कोरोना जैसी महामारी का इलाज इलायची सूंघने से पलक झपकते ही हो जाता है। आधुनिक विज्ञान सालों रिसर्च करता रहता है, जबकि व्हाट्सएप के चाचू-ताऊ वाले प्रोफेसर केवल दो लाइन की पोस्ट में परमाणु बम बनाने की विधि से लेकर अमर होने का नुस्खा तक बांट देते हैं। ‘सूत्रों के हवाले से’ मिली यह जानकारी इतनी अचूक होती है कि घर के बुजुर्ग अपनी असली दवाइयां छोड़कर घरेलू नुस्खों पर भरोसा करने लगते हैं।
फॉरवर्ड बटन दबाएं और मोक्ष पाएं
इस विश्वविद्यालय की सबसे खास बात यह है कि यहाँ परीक्षा नहीं देनी होती, बल्कि अंधविश्वास की परीक्षा ली जाती है। संदेश के अंत में लिखा होता है—”यदि आपने इस संदेश को 11 लोगों को फॉरवर्ड नहीं किया, तो कुछ अनहोनी हो सकती है।” इस डर और लालच के चक्रव्यूह में फंसे हमारे देश के होनहार छात्र इतिहास को अपनी सुविधानुसार नए सिरे से लिखने का काम पूरी निष्ठा से कर रहे हैं।
काक-वाणी की तरफ से जनहित में जारी चेतावनी: अगली बार जब कोई आपको व्हाट्सएप पर ‘परम ज्ञान’ बांटे, तो थोड़ा रुकें, फैक्ट-चेक करें और अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें, न कि केवल अपने अंगूठे का!