Title: राजीव की खोज
एक सुहाना सवेरा था, जब पढ़े-लिखे शिक्षक जगदीश ने कठोर आँखों से अपने सामने खुले मैदान में खड़ी लड़की के रोने से अवाँछित होते हुए हृदय की गहराइयों में झकझोर से संघर्ष शुरू कर दिया। उन्होंने अपने जीवन में इतनी बार से संघर्ष झेला, फिर क्या वह अपनी छात्रा को ऐसे रोते नहीं देख सकते थे।
जगदीश ने उस लड़की को अपने साथ दरवाजे की ओर इशारा करते हुए कहा, “क्या हुआ बेटी, कुछ काम था?”
लड़की ने हां करते हुए अपनी तलवार को दिखाया और रोते हुए कहा, “सर वो मेरी तलवार है, मेरे पापा की तलवार।”
जगदीश ने हल्के से मुस्कुराकर कहा, “तो क्या हुआ बेटी, तलवार हो ही क्या रही है, अब पढ़ाई करने आए हो ना?”
लड़की हनसी और कहा, “हां सर, पढ़ाई करने आए हुए हैं, लेकिन मेरे पापा लम्बे समय से लापता हो गए हैं। मेरी तलवार को वो रखा करते थे। मुझे मालूम भी नहीं हुआ कि उन्हें क्या हुआ।”
जगदीश ने ऊँची इच्छाशक्ति से उस लड़की की आँखों में देखा नहीं सकते थे। उन्होंने अपना हाथ उसके सिर पर रखते हुए कहा, “तुम दुःखमय हो क्योंकि तुम्हारा पापा लापता है, पर मैं तुम्हारी मदद जरूर करूँगा। तुम ऽहर उठाओ और इस लम्बे सफर पर निकलो, राजीव की मदद से। वो जंगल में बहुत ही जान समझकर बसता है, वह तुम्हारी मदद जरूर करेगा।”
लड़की थोड़ा चौक गई, पर उसे प्रोत्साहन मिला। उसे लगा कि उस समय वह अकेली ही नहीं है जो अपने पापा की मदद माँगती है।
उसकी यात्रा शुरू हुई, वह एक मार्ग पर भटक गई थी जिसमें वह स्कूंटी से जा सकती थी। जगदीश ने उसे स्कूंटी दे दी, जिससे उसे अपना समय कड़ाके पढ़ाई पूरी करने में छोड़ना पड़ता था। वह राजीव के यहां जाने के लिए तैयार नहीं थी।
उसकी यात्रा बड़ी लम्बी थी, उसने दिन भर चलते हुए रात में एक चमत्कारिक गांव में ठहर गई थी। गाँव में जीते जी ट्रैक्टर के नीचे उसने बसे डीजल भरे डब्बे को देखा जो सुमंगल के लिए लिया जाता था।
बाद में उसने पता लगाया कि डीजल का वह डब्बा महेश नाम के व्यक्ति का है जो घर में अकेला हो, वह व्यक्ति अपने अकेलेपन से पार नहीं हो पाता। उसे लगता था कि उसे अपने साथ कुछ बात करना चाहिए।
लड़की ने तुरंत फोन उठाया, राजीव को फोन लगाया और बताया कि उसे एक व्यक्ति की मदद की जरूरत है। राजीव ने उसे कहा कि वह कठिन से कठिन समस्या को हल करने में सक्षम हैं। उसे सन्देश मिला था, उसकी दिशा में आदर शुरू हुआ था।
लड़की उठ खड़ी हुई और वह नीचे उतरी, महेश से मिल बैठी। उसने उसे उसके मामले के बारे में सुनाया, महेश ने उससे प्रश्न किए और उसकी समस्या को समझ गए।
राजीव ने उसकी समस्या को ध्यान से सुना और फिर उसके साथ संपर्क किया। कुछ समय बाद उसका फोन बजा, जब वह संचार उत्तर दे रहे थे। राजीव ने उसे कुछ नेत्रित किया और उससे समस्या को हल करने का विचार दिया।
महेश ने एक दोनों से संबंधित समस्या पेश की, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण मामलों को समझाया जाना चाहिए था, जो बड़ी समस्या से जुड़े हुए थे। राजीव ने एक कार्यक्रम तैयार किया जो कि दोनों की समस्या समाधान करने के लिए था।
फिर उसी स्थान पर, राजीव ने ओरिजीनल रीसेप्ट को बनाया और उसे समस्या के समाधान के लिए उपलब्ध कराया। उस दिन से महेश और उसकी परिवार ने उसे अपने जीवन का सभी समस्याओं का समाधान चाहते हुए महसूस किया। उन्हें उसकी प्रतिक्रिया देखकर पता चला कि यह एक बड़ा परिवर्तन था जो उनके जीवन में आया था।
लड़की ने भी अपने पापा को खोजे बिना नयी नौकरी पाई। उसने अपनी पढ़ाई पैदा की और उसके पापा की तलाश में पुरी दुनियाँ का सहारा लिया।
बाद में उसने जगदीश से कहा, “शुक्र है सर, संघर्ष, सफलता का महत्व सीखाने के लिए।”