स्वागत है आपका ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में! यहाँ ज्ञान पाने के लिए किसी प्रवेश परीक्षा की जरूरत नहीं होती, बस अंगूठे में “फॉरवर्डेड” बटन दबाने की फुर्ती होनी चाहिए। हमारे पारिवारिक ग्रुप्स में सुबह की चाय के कप से भाप उठने से पहले ही ब्रह्मांड के सारे रहस्यों से परदा उठा दिया जाता है। तो आइए, आज हम इस यूनिवर्सिटी के कुछ ऐसे “ऐतिहासिक सत्यों” का पोस्टमार्टम करते हैं, जिन्होंने विज्ञान और इतिहास को घुटनों पर ला दिया है।
१. यूनेस्को द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करने की बीमारी
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का सबसे पसंदीदा और आज्ञाकारी संगठन “यूनेस्को” (UNESCO) है। हर दूसरे महीने यूनेस्को बिना किसी सर्वे या वोटिंग के हमारे राष्ट्रगान, हमारी राष्ट्रभाषा या हमारे किसी नेता को “विश्व का सर्वश्रेष्ठ” घोषित कर देता है। बेचारे यूनेस्को के असली अधिकारी पेरिस में बैठकर सोचते होंगे कि आखिर वे भारत में इतनी डिग्रियां कब और किसे बांट रहे हैं! सच्चाई यह है कि यूनेस्को के पास इस तरह के फालतू सर्टिफिकेट बांटने का बिल्कुल समय नहीं है। लेकिन हमारे फूफाजी के अनुसार, यूनेस्को की वेबसाइट से ज्यादा प्रामाणिक उनका अपना पारिवारिक ग्रुप ‘जय श्री कृष्णा’ है।
२. नासा की ‘दिवाली वाली’ अद्भुत तस्वीर
हर साल दिवाली के अगले दिन, नासा (NASA) अंतरिक्ष से ली गई भारत की एक ऐसी चमचमाती तस्वीर जारी करता है, जिसमें पूरा देश तिरंगे के रंगों में जगमगाता हुआ दिखता है। इस तस्वीर को देखकर हर भारतीय का सीना गर्व से फूल जाता है। असली सच यह है कि यह कोई लाइव फोटो नहीं, बल्कि मौसम के बदलाव और आबादी के घनत्व को दर्शाने के लिए बनाई गई एक पुरानी कंप्यूटर-जनरेटेड थ्री-डी इमेज है। नासा वाले खुद परेशान हैं कि उनके कैमरे सिर्फ भारत के दीयों की रोशनी ही क्यों पकड़ पाते हैं, बाकी दुनिया के बल्ब क्यों नहीं!
३. ‘इस लिंक पर क्लिक करें और मुफ्त रीचार्ज पाएं’
“मुकेश अंबानी के पोते के जन्मदिन की खुशी में, जिओ दे रहा है ३ महीने का मुफ्त रीचार्ज! नीचे दिए गए नीले लिंक पर क्लिक करें और इसे १५ दोस्तों को भेजें।” इस संदेश को पढ़कर हमारे देश के सीधे-साधे लोग ऐसे सक्रिय होते हैं जैसे उन्हें देश की जीडीपी सुधारने का जिम्मा मिल गया हो। सच्चाई का कड़वा घूंट यह है कि इस लिंक पर क्लिक करने से आपको मुफ्त इंटरनेट तो नहीं मिलेगा, लेकिन आपका पर्सनल डेटा हैकर्स के पास जरूर पहुंच जाएगा। मुफ्त के चक्कर में अपने फोन का कबाड़ा न करवाएं।
निष्कर्ष: थोड़ा ठहरिए, फिर फॉरवर्ड कीजिए!
प्यारे व्हाट्सएप शोधकर्ताओं, अगली बार जब आपके फोन की घंटी बजे और कोई संदेश “अति महत्वपूर्ण” या “ब्रेकिंग न्यूज़” के रूप में आए, तो अपनी उंगलियों को थोड़ा आराम दें। फॉरवर्ड का बटन दबाने से पहले गूगल बाबा से भी पूछ लें। याद रखिए, हर पीली चीज सोना नहीं होती और हर व्हाट्सएप मैसेज सच नहीं होता। पढ़ते रहिए ‘काक-वाणी’, ताकि आपका सामान्य ज्ञान अंधविश्वास की बलि न चढ़े!