महामानव का ‘अमर’ सिंहासन: जब तक सूरज-चाँद रहेगा, ‘प्रधान सेवक’ का राज रहेगा!

वाह! बधाई हो मित्रों, बधाई हो! आखिरकार वह ऐतिहासिक घड़ी आ ही गई, जिसका इंतजार सदियों से इस देश की ‘परम-भक्त’ जनता को था। सरकारी भोंपू यानी ‘न्यूज ऑन एआईआर’ ने ढोल-नगाड़े बजाकर घोषणा की है कि हमारे परम आदरणीय, अथक परिश्रमी और चौबीसों घंटे काम करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित शासनाध्यक्ष (मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक) बन गए हैं। अब इस बात पर ताली बजनी चाहिए, और जो न बजाए, उसे सीधे ‘टूलकिट गैंग’ घोषित कर देना चाहिए।

नेहरू जी, जरा बगल हटिए!

अब नेहरू प्रेमियों के पेट में मरोड़ उठना स्वाभाविक है। वे अब इतिहास की धूल खाई किताबें लेकर बैठ जाएंगे और दिन गिनने लगेंगे। अरे साहब, नेहरू जी तो सिर्फ दिल्ली की मखमली कुर्सी पर बैठे थे, उन्होंने गुजरात की उस तपती धूप में मुख्यमंत्री की कुर्सी का ‘कष्ट’ कहाँ भोगा था? हमारे साहब ने तो भुज के भूकंप से लेकर दिल्ली के जी-20 शिखर सम्मेलन तक, हर आपदा को अवसर में बदला है। इसे कहते हैं असली ‘चक्रवर्ती शासक’

थकान? वह किस चिड़िया का नाम है?

इस महान उपलब्धि का असली श्रेय साहब की उस जादुई ऊर्जा को जाता है, जो उन्हें बिना थके, बिना रुके, लगातार कैमरे के सामने बने रहने की प्रेरणा देती है। आम इंसान तो एक बार चुनाव जीतकर पांच साल में ही बूढ़ा दिखने लगता है, लेकिन हमारे ‘प्रधान सेवक’ का तेज दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रही है। विपक्ष चिल्लाता रह गया कि ‘बेरोजगारी है, महंगाई है’, लेकिन धन्य है यह महान जनता, जिसने कहा—’अरे, साहब विश्व रिकॉर्ड बना रहे हैं, तुमको अपनी दो वक्त की रोटी की पड़ी है?’

भविष्य का मार्ग: अभी तो यह झांकी है!

इस रिकॉर्ड के बाद, अब काक-वाणी को यह शंका सता रही है कि कहीं इतिहास की किताबों से बाकी सभी प्रधानमंत्रियों के पन्ने ही न फाड़ दिए जाएं। वैसे भी, जब नया भारत बन रहा है, तो इतिहास भी नया ही होना चाहिए। विपक्ष अब भी ईवीएम का रोना रो रहा है, जबकि उन्हें समझना चाहिए कि साहब की कुर्सी कोई साधारण लकड़ी की नहीं, बल्कि ‘परम-आस्था’ की प्रतीक है।

तो आइए, इस शुभ अवसर पर हम सब मिलकर थाली बजाएं, और कामना करें कि साहब का यह सफर ‘अमरीकी राष्ट्रपति’ के कार्यकाल की सीमा को लांघते हुए सीधे अमरता को प्राप्त हो। आखिर, साहब के बिना टीवी चैनलों की टीआरपी और हमारा मनोरंजन कैसे चलेगा?


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कागा जी