WhatsApp यूनिवर्सिटी के ‘नोबेल प्राइज’ विजेता दावे और हमारी मासूम जनता

नमस्कार मित्रों! आपका स्वागत है ‘काक-वाणी’ के विशेष स्तंभ ‘WhatsApp यूनिवर्सिटी’ में। आज हम बात करेंगे उस परम ज्ञान की, जो बिना किसी लैब टेस्ट, वैज्ञानिक रिसर्च या सामान्य ज्ञान के सीधे आपके इनबॉक्स में लैंड करता है। हमारे देश में ज्ञान की गंगा अब हिमालय से नहीं, बल्कि ‘Forwarded as received’ के मार्ग से बहती है। आइए, इस ज्ञान गंगा में डुबकी लगाकर कुछ वायरल दावों की कड़वी (और बेहद मजेदार) सच्चाई का फैक्ट-चेक करते हैं।

यूनेस्को का ‘राष्ट्रगान’ वाला शाश्वत प्रेम

साल का कोई भी महीना हो, मौसम कैसा भी हो, लेकिन यूनेस्को (UNESCO) को भारतीय राष्ट्रगान को “दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान” घोषित करने से फुर्सत नहीं मिलती। बेचारे यूनेस्को के अधिकारियों को शायद पता भी नहीं होगा कि वे हर तीसरे महीने भारत के राष्ट्रगान को यह खिताब दे देते हैं। यदि आप इस दावे को सच मानकर किसी विदेशी दोस्त के सामने गर्व से चौड़े हो रहे हैं, तो रुकिए! यूनेस्को ऐसी कोई लिस्ट जारी नहीं करता। लेकिन हमारे पारिवारिक ग्रुप के ‘फूफा जी’ इस खबर को ऐसे शेयर करते हैं जैसे यूनेस्को का मुख्यालय उनके घर की बैठक में ही हो और सर्टिफिकेट उन्हीं के हाथों से दिया गया हो।

नासा की आँखें और दीवाली के पटाखे

दूसरा अद्भुत दावा है नासा (NASA) की वह कथित तस्वीर, जिसमें दीवाली की रात भारत अंतरिक्ष से सोने की तरह जगमगाता हुआ दिखता है। इस तस्वीर को देखकर हर भारतीय का सीना 56 इंच का हो जाता है। सच तो यह है कि वह तस्वीर नासा की नहीं, बल्कि किसी ग्राफिक्स डिजाइनर के ‘क्रिएटिव कीड़े’ का रंगीन नतीजा होती है। नासा वाले खुद हैरान हैं कि वे हर साल दीवाली पर भारत की लाइटें गिनने के अलावा और क्या काम करते हैं!

नींबू-लहसुन से कैंसर और कोरोना का खात्मा!

अब आते हैं मेडिकल साइंस के चमत्कार पर। WhatsApp यूनिवर्सिटी के स्वघोषित नोबेल पुरस्कार विजेताओं के अनुसार, यदि आप सुबह उठकर गर्म पानी में नींबू, लहसुन और चुटकी भर बेकिंग सोडा मिलाकर पीते हैं, तो कैंसर और कोरोना जैसी बीमारियां दुम दबाकर भाग जाएंगी। दुनिया भर के बड़े-बड़े डॉक्टर अपनी डिग्रियां जलाने की सोच रहे हैं, क्योंकि जो इलाज अरबों डॉलर के रिसर्च से नहीं मिला, वह हमारे पड़ोस वाले गुप्ता जी ने सुबह की चाय के साथ एक फॉरवर्डेड मैसेज में खोज निकाला।

फैक्ट-चेक की कड़वी दवा

मित्रों, इस डिजिटल युग में अंधविश्वास की गति प्रकाश की गति से भी तेज है। जब भी आपके पास “इसे 11 लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी” या “नासा का नया खुलासा” जैसा कोई संदेश आए, तो कृपया अपनी बुद्धि का ‘एंटी-वायरस’ ऑन करें। गूगल बाबा मुफ्त में उपलब्ध हैं, ज़रा कष्ट कीजिए और फैक्ट-चेक कर लीजिए। वरना, बहुत जल्द यूनेस्को आपके इस अंधविश्वास को “दुनिया का सबसे बड़ा मूर्खतापूर्ण दावा” घोषित करने ही वाला है!

कागा जी