व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नया फरमान: यूनेस्को ने घोषित किया भारत की ‘चाय’ को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ अमृत!

नमस्कार देवियों और सज्जनों! ‘काक-वाणी’ के विशेष स्तंभ ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। आज हमारे खोजी कौवों ने इंटरनेट के उस अथाह दलदल से ज्ञान की ऐसी बूँदें निकाली हैं, जिन्हें पढ़कर अल्बर्ट आइंस्टीन भी अपनी कब्र में दोबारा लेट जाएंगे। जी हां, हम बात कर रहे हैं व्हाट्सएप पर वायरल होने वाले उन परम सत्यों की, जिनकी ताकत के आगे विज्ञान और तर्क घुटने टेक चुके हैं।

यूनेस्को का ताजा ‘महा-घोषणा पत्र’

पिछले हफ्ते आपके पारिवारिक ग्रुप ‘गुप्ता परिवार’ या ‘हैप्पी संडे’ में एक संदेश तैरता हुआ आया होगा। चमकीले पीले अक्षरों में लिखा था— “गर्व से कहो हम भारतीय हैं! यूनेस्को ने भारत की ‘अदरक वाली कड़क चाय’ को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय अमृत घोषित किया है। इसे पीने से कोरोना तो क्या, जीवन के सारे क्लेश दूर हो जाते हैं।”

अब हमारे परम आदरणीय फूफाजी और ताऊजी ने बिना एक सेकंड गंवाए, देशप्रेम की भावना में बहकर इसे 50 ग्रुप्स में फॉरवर्ड कर दिया। वैसे, यूनेस्को के पास इस वक्त शायद यही एकमात्र जरूरी काम बचा है कि वह पेरिस का दफ्तर बंद करके भारत की हर गली में समोसा, ढोकला और चाय को ‘विश्व धरोहर’ का सर्टिफिकेट बांटता फिरे। सच तो यह है कि यूनेस्को की वेबसाइट पर ‘चाय’ का जिक्र सिर्फ कैंटीन के मेन्यू कार्ड में है, किसी वैश्विक घोषणा में नहीं।

नासा के वैज्ञानिकों का ‘रहस्यमयी’ शोध

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का दूसरा सबसे बड़ा सच है—नासा (NASA) का मुफ्त ज्ञान। वायरल मैसेज कहता है— “नासा के वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है कि सुबह खाली पेट बासी मुंह तांबे के लोटे का पानी पीने से इंसान की उम्र 150 साल हो सकती है और रात को बाईं करवट सोने से फेफड़े सीधे वाई-फाई की तरह दिमाग से जुड़ जाते हैं।”

अद्भुत! नासा वाले बेचारे वहां अंतरिक्ष में मंगल ग्रह पर पानी ढूंढ रहे हैं, और यहां व्हाट्सएप के ‘साइंटिस्ट’ उनके नाम पर तांबे के लोटे का पेटेंट करवा रहे हैं। नासा का इस घरेलू नुस्खे से उतना ही लेना-देना है, जितना एक कौवे का अंतरिक्ष यात्रा से है। लेकिन हमारे व्हाट्सएप के स्वयंभू चाणक्य इस सच को साबित करने के लिए अपनी पूरी एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं।

काक-वाणी का निष्कर्ष: फॉरवर्ड बटन ही सत्य है!

इस पूरी यूनिवर्सिटी का एक ही नियम है—’तथ्य जाए भाड़ में, फॉरवर्ड रहना चाहिए पहाड़ पे।’ अगर किसी मैसेज के ऊपर ‘Forwarded many times’ लिखा है, तो वह वेद वाक्य से भी बढ़कर है। इसलिए, बिना सोचे-समझे सुबह-शाम ज्ञान की गंगा बहाते रहिए, क्योंकि अफवाह फैलाना ही असली ‘सोशल सर्विस’ है!

कागा जी