प्रणाम ज्ञानवीरों! सुबह की राम-राम और चाय की चुस्की के साथ आपके फोन की घंटी बजी होगी और आपको मिला होगा एक चमत्कारी संदेश। जी हां, ‘काक-वाणी’ के विशेष स्तंभ ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आज हम उस ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाएंगे, जो सीधे नासा के हेडक्वार्टर से बहती हुई आपके फूफाजी के मोबाइल तक पहुंची है। सोशल मीडिया के इस दौर में सच और झूठ का ऐसा मिलन हुआ है कि खुद विधाता भी सिर पकड़ कर बैठ गए हैं।
यूनेस्को का एकमात्र काम: भारत को अवार्ड बांटना
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के अनुसार, यूनेस्को (UNESCO) के पास दुनिया में और कोई काम नहीं बचा है। उनका मुख्य कार्यालय पेरिस में नहीं, बल्कि किसी खाली बैठे ‘एडमिन’ के दिमाग में चलता है। हर तीसरे महीने यूनेस्को भारत के राष्ट्रगान को “दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान” घोषित कर देता है। कभी-कभी तो हमारी 2000 रुपये की लुप्तप्राय गुलाबी पत्ती (नोट) में जीपीएस चिप होने का दावा भी इसी संस्था के मत्थे मढ़ दिया जाता है। सच यह है कि यूनेस्को बेचारा अपनी वेबसाइट पर स्पष्टीकरण दे-देकर थक चुका है, लेकिन हमारे देश के स्वाभिमानी व्हाट्सएप फॉरवर्डर्स बिना “फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स” के इस सच को मानने को तैयार ही नहीं हैं।
नासा का नया मिशन: आपके किचन पर नजर
दूसरा बड़ा झूठ जो रोज सुबह लाल-पीले गुलाबों के साथ तैरता है, वह है नासा (NASA) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया “महा-अध्ययन”। व्हाट्सएप के वैज्ञानिकों के अनुसार, नासा ने सिद्ध किया है कि तांबे के लोटे में पानी पीने से लेकर घर के कोने में कपूर जलाने से ओजोन परत ठीक हो रही है। हद तो तब हो गई जब यह खबर वायरल हुई कि नासा ने अंतरिक्ष से दिवाली के दिन सिर्फ भारत को जगमगाते हुए देखा। सच तो यह है कि नासा के वैज्ञानिक अपनी दूरबीन से सुदूर ब्रह्मांड में ब्लैक होल ढूंढ रहे हैं, और यहां हमारे व्हाट्सएप के महारथी उनके नाम पर इलायची से पेट की गैस और कैंसर का इलाज खोज रहे हैं।
सत्य की खोज और अंतिम चेतावनी
प्रिय पाठकों, इस WhatsApp Viral Fact Check का सार यही है कि जो खबर “तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक शुभ समाचार मिलेगा” के दावे के साथ आए, वह केवल आपके अंगूठे की कसरत है। सच यह है कि यूनेस्को रोज अवार्ड नहीं बांट रहा और नासा आपके किचन के मसालों पर शोध नहीं कर रहा है। इसलिए अगली बार जब कोई चमत्कारी संदेश आए, तो उसे फॉरवर्ड करने से पहले अपनी बुद्धि की बत्ती जरूर जलाएं, क्योंकि व्हाट्सएप पर तैरता हर ज्ञान मोती नहीं होता, कुछ सिर्फ गोबर भी होता है।