वाह! क्या दिन आ गए हैं। कहाँ तो वह दौर था जब ह्यूस्टन के मैदान में ‘अबकी बार, ट्रम्प सरकार’ का नारा गूँज रहा था, और कहाँ आज का दिन है जब ‘काक-वाणी’ को यह देखना पड़ रहा है कि हमारे परम मित्र डोनाल्ड ट्रम्प को भारत आँखें दिखा रहा है। अल-जज़ीरा की मानें तो मोदी जी का भारत अब ट्रम्प साहब से सीधे पंगा ले रहा है—टैरिफ से लेकर आतंकवाद तक, हर मोर्चे पर दो-दो हाथ करने को तैयार है। इसे कहते हैं असली ‘आत्मनिर्भरता’!
झप्पी कूटनीति से टैरिफ की ‘तनातनी’ तक
कल तक जो दोनों नेता ऐसे गले मिलते थे जैसे कुंभ के मेले में बिछड़े भाई मिल गए हों, आज उनके बीच ‘टैरिफ’ की दीवार खड़ी हो गई है। ट्रम्प दादा, जिन्हें दुनिया ‘टैरिफ किंग’ कहती है, भारत पर भारी-भरकम टैक्स लगाने की धमकी दे रहे हैं। लेकिन हमारे साहब भी कहाँ कम हैं? उन्होंने साफ़ कर दिया है कि अगर आप हमारी ‘दवा’ पर रोक लगाएँगे, तो हम भी आपकी ‘हार्ले डेविडसन’ के पहिये जाम करने की ताकत रखते हैं। इसे कहते हैं—’जैसे को तैसा’। अमेरिका फर्स्ट के सामने अब ‘इंडिया फर्स्ट’ का बोर्ड लग चुका है, और ट्रम्प बाबू अपनी चील जैसी आँखों से यह देखकर हैरान हैं।
आतंकवाद पर बदला सुर: ‘काक-वाणी’ का विश्लेषण
बात सिर्फ व्यापार की नहीं है। आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत ने अब ‘नो कॉम्प्रोमाइज’ का बोर्ड लटका दिया है। जब ट्रम्प प्रशासन अपने चुनावी फायदों के लिए आतंकवाद की परिभाषा बदलने की कोशिश करता है, तो भारत दो टूक शब्दों में कह देता है, “अपनी कूटनीति अपने पास रखिए।” भारत ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा। ट्रम्प बाबू सोचते थे कि वे सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर दुनिया को नचा लेंगे, लेकिन यहाँ तो पूरा भारत ही अपनी शर्तों पर खड़ा है।
तो लब्बोलुआब यह है कि ‘हाउडी मोदी’ का वह मखमली दौर अब बीती बात हो चुका है। अब तो ‘इक्वल टू इक्वल’ का जमाना है। ‘काक-वाणी’ के पाठकों, कमर कस लीजिए, क्योंकि आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि ट्रम्प की ‘डीलिंग’ पर मोदी जी की कूटनीति कैसे भारी पड़ती है। आखिरकार, दोस्ती अपनी जगह है, और देश का व्यापार और सम्मान अपनी जगह!
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