साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की ताजा रिपोर्ट आई है कि भारत अब यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए बेहद ‘गंभीर’ हो गया है। जी हां, आपने बिल्कुल ठीक पढ़ा। हमारे प्यारे देश में बेरोजगारी, महंगाई, सड़कों के जानलेवा गड्ढे और प्रदूषण जैसी ‘इतनी छोटी’ समस्याएं तो अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। अब जब देश के भीतर करने को कोई काम बचा ही नहीं है, तो हमारे परम आदरणीय PM Modi ने सोचा होगा कि चलो खाली बैठे-बैठे बोर होने से अच्छा है कि रूस और यूक्रेन का युद्ध ही रुकवा दिया जाए!
विश्वगुरु की कूटनीति: एक झप्पी में छिपा है समाधान
काक-वाणी के सूत्रों की मानें तो वैश्विक कूटनीति के इतिहास में पहली बार ‘झप्पी डिप्लोमेसी’ का ऐसा भव्य प्रदर्शन होने जा रहा है। हमारे मुखिया जब पुतिन को गले लगाते हैं, तो अमेरिका का दिल धक-धक करने लगता है। और जब जेलेंस्की के कंधे पर हाथ रखते हैं, तो क्रेमलिन में चाय की प्याली हिल जाती है। इस त्रिकोणीय प्रेम और युद्ध के त्रिकोण में, भारत अब परम मध्यस्थ की भूमिका में है। आखिर विश्वगुरु होने का यही तो असली फायदा है—हम दोनों तरफ से खेल सकते हैं और दोनों तरफ के रेफरी भी खुद ही बन सकते हैं। वैसे भी, जब तक यह युद्ध चलेगा नहीं, तब तक हमारे देश के देशभक्त टीवी एंकरों को शाम की डिबेट के लिए मसाला कैसे मिलेगा?
सस्ता तेल या नोबेल शांति पुरस्कार की चाह?
कुछ दुष्ट और ‘राष्ट्रविरोधी’ बुद्धिजीवी कह रहे हैं कि भारत की इस शांति-प्रिय कूटनीति के पीछे केवल सस्ता रूसी तेल और नोबेल शांति पुरस्कार की लालसा है। भला हमारे देश के नेताओं के बारे में ऐसी घटिया सोच कौन रखता है? हम तो विशुद्ध रूप से वसुधैव कुटुंबकम के पुजारी हैं! वह अलग बात है कि जब तक यूक्रेन पर बम गिरते रहे, हमें डिस्काउंट पर कच्चा तेल मिलता रहा और हमारी रिफाइनरियों की चांदी होती रही। लेकिन अब शायद तेल के ड्रम भर चुके हैं, इसलिए हमें अचानक ‘शांति’ की याद आने लगी है। उधर यूक्रेन के राष्ट्रपति भी सोच रहे होंगे कि रूसी मिसाइलों से बचना आसान है, लेकिन भारतीय आईटी सेल के ‘युद्ध रुकवा दी पापा’ वाले विज्ञापनों से बचना नामुमकिन है।
निष्कर्ष: अब युद्ध का अंत निश्चित है!
यूक्रेन और रूस के नागरिकों को अब घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। जब भारत इस मामले में गंभीर हो चुका है, तो समझिए कि युद्ध विराम बस कुछ ही यूट्यूब रील्स और इंस्टाग्राम पोस्ट्स की दूरी पर है। बस अब देखना यह है कि जब युद्ध रुक जाएगा, तो इस ऐतिहासिक सफलता का क्रेडिट लेने के लिए सबसे पहले दिल्ली की सड़कों पर किसके पोस्टर लगेंगे। तब तक के लिए, शांति बनाए रखिए, महंगा पेट्रोल भरवाइए और विश्वगुरु के अगले इंटरनेशनल टूर का टिकट बुक होने का इंतजार कीजिए!
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