‘काक-वाणी’: न्यूयॉर्क टाइम्स को अब दिखा ‘युवराज’ का नया अवतार, क्या इस बार हो पाएगा री-लॉन्च?

वाह! सात समंदर पार बैठे हमारे पश्चिमी पत्रकारों की दूरबीन को आदर सहित प्रणाम। न्यूयॉर्क टाइम्स नाम के महान ज्ञानसागर ने अचानक यह अद्भुत खोज की है कि भारत में एक ‘राजनीतिक घराने के वारिस’ अपने जीवन के सबसे बड़े मौके को लपकने की कोशिश कर रहे हैं। अब आप ही बताइए, जिस बात को भारत की जनता पिछले बीस सालों से एक ‘अनंत री-लॉन्च धारावाहिक’ की तरह देख रही है, उसे समझने में अमेरिकी पत्रकारों को दो दशक लग गए? इसे कहते हैं – देर आए, पर विदेश से आए!

री-लॉन्च का अनंतकाल और विदेशी चश्मा

अरे साहब, यह कोई पहला ‘मोमेंट’ थोड़ी है! हमारे युवराज हर चुनाव से ठीक पहले एक नए, एकदम ‘ब्रांड न्यू’ अवतार में अवतरित होते हैं। कभी वे मोहब्बत की दुकान का फीता काटते हैं, तो कभी भारत भ्रमण पर निकलकर देश का भूगोल समझते हैं। लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स वालों को लगता है कि यह कोई ‘नया क्षण’ है। अरे भाई, हमारे यहाँ तो युवराज का राजनीतिक करियर किसी स्मार्टफोन के सॉफ्टवेयर अपडेट जैसा है – हर साल नया वर्जन आता है, लेकिन सिस्टम फिर भी हैंग ही करता है!

अमेरिकी अखबार ने बड़े गंभीर लहजे में लिखा है – “सीज हिज मोमेंट” (अपने क्षण को भुनाना)। अब इन गोरे साहबों को कौन समझाए कि हमारे युवराज मौका लपकते नहीं हैं, बल्कि मौका खुद उनके पास आकर थक जाता है और फिर अगले पांच साल के लिए आराम करने चला जाता है। हमारे देसी दरबारी पसीना बहा-बहाकर थक गए कि “अबकी बार युवराज परिपक्व हो गए हैं”, पर जनता बेचारी हर बार यही पूछती रह जाती है कि – भाई, आखिर यह परिपक्वता आती किस स्टेशन पर है?

गोरे साहब का सर्टिफिकेट और देसी राजनीति

वैसे, हमारे देश की लुटियंस ब्रिगेड की बलिहारी है। जैसे ही किसी विदेशी अखबार में युवराज की तारीफ में दो शब्द छपते हैं, वे ऐसे झूमने लगते हैं मानो नोबेल पुरस्कार मिल गया हो। “देखिए-देखिए, न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी मान लिया!” अरे हुजूर, न्यूयॉर्क टाइम्स को भारत की जमीनी राजनीति की उतनी ही समझ है, जितनी किसी अंग्रेज को भोजपुरी की मिठास की। उनके लिए भारत का लोकतंत्र एक ‘शाही नाटक’ जैसा है, जिसमें जब तक कोई राजा का बेटा संघर्ष करता हुआ न दिखे, तब तक कहानी में टीआरपी नहीं आती।

खैर, काक-वाणी की तरफ से युवराज को इस नए ‘मोमेंट’ की ढेरों शुभकामनाएं। उम्मीद है कि इस बार जब वे इस मौके को लपकेंगे, तो वह हाथ से फिसलेगा नहीं। वरना 2029 में न्यूयॉर्क टाइम्स को फिर से यही हेडलाइन छापनी पड़ेगी – “युवराज का एक और नया मोमेंट!”


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कागा जी