बॉलीवुड में जब भी चॉकलेटी हीरो अपनी प्रेमिका के लिए सरसों के खेतों में गिटार बजा रहे थे, ठीक उसी दौर में एक इंसान पर्दे पर आता है, उंगलियों के बीच सिगरेट दबाता है और अपनी कड़क आवाज में चिल्लाता है- “आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने!” जी हां, हम बात कर रहे हैं भारतीय सिनेमा के सबसे अनप्रिडिक्टेबल और पावरहाउस एक्टर नाना पाटेकर की। हाल ही में प्रतिष्ठित ‘फ्रंटलाइन मैगजीन’ ने भारतीय सिनेमा में ‘एंटी-हीरो’ के विकास और उसमें नाना पाटेकर के ऐतिहासिक योगदान पर एक बेहतरीन फीचर प्रकाशित किया है, जिसने सोशल मीडिया और सिने-प्रेमियों के बीच हलचल मचा दी है।
नाना पाटेकर: न सफेद, न काला… बिल्कुल ‘रॉ’ और ग्रे!
सालों से हिंदी सिनेमा में ‘हीरो’ का मतलब होता था एक आदर्श इंसान, जो कभी गलती नहीं करता। लेकिन नाना पाटेकर ने इस घिसे-पिटे फॉर्मूले को अपनी अदाकारी से उखाड़ फेंका। फिल्म ‘परिंदा’ का वह खौफनाक ‘अन्ना’ याद है? जो खुद आग से डरता था, लेकिन अपने दुश्मनों को जिंदा जलाने में एक सेकंड नहीं सोचता था। नाना पाटेकर ने पर्दे पर एक ऐसे एंटी-हीरो को गढ़ा, जो न तो पूरी तरह से हीरो था और न ही पारंपरिक विलेन। वह समाज का वही कड़वा सच था जिसे लोग देखना तो चाहते थे, पर स्वीकारने से डरते थे।
‘क्रांतिवीर’ से लेकर ‘अपहरण’ तक का सफर!
‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘त्रिशक्ति’ और ‘अपहरण’ जैसी फिल्मों में नाना ने यह साबित कर दिया कि दर्शक सिर्फ सीधे-साधे आदर्शों वाले नायकों पर ही तालियां नहीं बजाते। जब-जब नाना पाटेकर पर्दे पर चीखे, तब-तब थिएटर में बैठी जनता ने अपने अंदर के गुस्से को शांत होते देखा। ‘फ्रंटलाइन’ का लेख इसी बात को रेखांकित करता है कि कैसे नाना पाटेकर ने भारतीय सिनेमा के एंटी-हीरो को सिर्फ एक नकारात्मक किरदार नहीं, बल्कि कहानी का सबसे मजबूत और मुख्य आधार बना दिया।
कॉमेडी में भी बरकरार रहा वही भौकाल!
मजेदार बात यह है कि नाना पाटेकर की यह एंटी-हीरो वाली छवि सिर्फ गंभीर और एक्शन फिल्मों तक सीमित नहीं रही। फिल्म ‘वेलकम’ में उनका ‘उदय भाई’ का किरदार भी असल में एक अंडरवर्ल्ड डॉन (एंटी-हीरो) ही था। लेकिन नाना की जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग ने उसे आइकॉनिक बना दिया। “भगवान का दिया सब कुछ है… दौलत है, शोहरत है…” वाला डायलॉग आज भी मीम-नगरी का राजा बना हुआ है!
कुल मिलाकर, ‘काक-वाणी’ का तो यही मानना है कि बॉलीवुड में ढेरों हीरो आएंगे और जाएंगे, लेकिन जो आतिशबाजी नाना पाटेकर ने अपनी तीखी आंखों, संवाद अदायगी और संजीदा अभिनय से पर्दे पर लगाई है, उसकी चमक हमेशा बरकरार रहेगी। एंटी-हीरो के इस असली ‘क्रांतिवीर’ को हमारा कड़क सलाम!
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