बॉलीवुड का रंग-रूप बाहर से जितना चमकदार दिखता है, अंदर की कहानी अक्सर कुछ और ही बयां करती है। अब इस रंगीन दुनिया के बीच ‘सेक्रेड गेम्स’ और ‘मेड इन हेवन’ जैसी सीरीज़ से तहलका मचा चुकीं खूबसूरत एक्ट्रेस एलनाज नौरोजी ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिससे बी-टाउन के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एलनाज ने साफ-साफ शब्दों में कहा है कि पश्चिमी सिनेमा यानी हॉलीवुड में भारतीय सिनेमा की तुलना में कहीं ज्यादा डायवर्सिटी (विविधता) और खुले विचार देखने को मिलते हैं!
हॉलीवुड vs बॉलीवुड: कहाँ मिलता है कलाकारों को असली हक?
ईरानी मूल की एक्ट्रेस एलनाज नौरोजी, जिन्होंने कई सालों तक भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम किया है, का मानना है कि हॉलीवुड अब हर देश, भाषा और संस्कृति के कलाकारों को दिल खोलकर अपना रहा है। वहाँ किरदार सिर्फ रंग या राष्ट्रीयता देखकर तय नहीं होते। दूसरी तरफ, हमारे प्यारे बॉलीवुड में आज भी बाहर से आए कलाकारों को सिर्फ ‘विदेशी ग्लैमर’ बढ़ाने के लिए रखा जाता है या फिर उन्हें एक ही तरह की ब्रैकेट में बंद कर दिया जाता है।
स्टीरियोटाइप का शिकार बनता है टैलेंट!
अपनी भड़ास निकालते हुए एलनाज ने कहा कि जब कोई विदेशी या अलग बैकग्राउंड का एक्टर भारत आता है, तो इंडस्ट्री उसे एक खास सांचे में ढालने की कोशिश करती है। भले ही वह कितनी भी बेहतरीन हिंदी बोल ले या कमाल की एक्टिंग कर ले, उसे मुख्यधारा के देसी किरदारों में जल्दी स्वीकार नहीं किया जाता। जबकि हॉलीवुड में अब एशियाई, मिडिल ईस्टर्न और अफ्रीकी कलाकारों को बड़े और दमदार लीड रोल्स दिए जा रहे हैं, जहाँ उनके टैलेंट की कद्र होती है।
काक-वाणी का चटपटा नज़रिया
अब सच कहें तो एलनाज मैडम ने बात तो 100 टके की कही है! हमारा बॉलीवुड ग्लोबल बनने का दावा तो बड़े जोर-शोर से करता है, लेकिन जब बात किसी गैर-भारतीय चेहरे को पूरी तरह देसी रोल में ढालने की आती है, तो मेकर्स के पसीने छूट जाते हैं। अगर हिंदी सिनेमा को वाकई दुनिया भर में राज करना है, तो उसे घिसे-पिटे स्टीरियोटाइप से बाहर निकलना ही होगा। अब देखना यह है कि बी-टाउन के बड़े-बड़े मेकर्स एलनाज की इस सीधी बात से कुछ सबक लेते हैं या हमेशा की तरह बात को गोल कर जाते हैं!
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