हॉलीवुड में 100 दिन पहले हाउसफुल, और बॉलीवुड में 3 दिन पहले तक सस्पेंस! जानिए क्यों पिछड़ा भारतीय सिनेमा

अरे जनाब, जरा सोचिए! हॉलीवुड में ‘अवेंजर्स’ या ‘अवतार’ जैसी फिल्मों की टिकटें रिलीज से 100 दिन पहले ही बिकनी शुरू हो जाती हैं। वहां के दर्शक 3 महीने बाद फिल्म देखते वक्त कौन सा पॉपकॉर्न खाएंगे, यह भी पहले ही तय कर लेते हैं। लेकिन हमारे बॉलीवुड का क्या हाल है? यहां फिल्म रिलीज होने में बस 3 दिन बचते हैं और खबर आती है कि “एडवांस बुकिंग आज शाम 5 बजे खुलेगी!” आखिर ऐसा क्यों है? क्यों इंडियन सिनेमा हॉलीवुड के इस 100-डे एडवांस बुकिंग मॉडल का मुकाबला नहीं कर पाता? ‘काक-वाणी’ की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में जानिए इसके पीछे का असली कारण!

1. ‘सेंसर बोर्ड’ और ‘लास्ट मिनट एडिटिंग’ का ड्रामा

हॉलीवुड में फिल्में रिलीज की तारीख से कई महीने पहले एकदम तैयार होकर डिब्बे में बंद हो जाती हैं। लेकिन हमारे प्यारे बॉलीवुड में? अरे साहब, यहां तो रिलीज से एक हफ्ते पहले तक बैकग्राउंड स्कोर और वीएफएक्स (VFX) पर काम चल रहा होता है! शाहरुख खान की ‘जवान’ हो या सलमान खान की कोई ब्लॉकबस्टर, आखिरी वक्त तक सेंसर बोर्ड से कट और सर्टिफिकेट का इंतजार होता है। जब तक हरी झंडी न मिले, तब तक टिकट खिड़की का ताला कैसे खुलेगा?

2. थिएटर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स की सौदेबाजी

भारत में स्क्रीन एलोकेशन किसी ‘बिग बॉस’ के घर के क्लेश से कम नहीं है। मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन मालिकों के बीच प्राइम टाइम शोज (जैसे रात 8 बजे का शो) को लेकर रिलीज के 48 घंटे पहले तक समझौते होते रहते हैं। कौन सी फिल्म किस थिएटर में कितने शो पाएगी, इस पर आखिरी सांस तक रस्साकशी चलती है। जब थिएटर्स को ही नहीं पता कि उनके पास कौन सी फिल्म लग रही है, तो वे बुकिंग कैसे शुरू करें?

3. भारतीय दर्शकों का मूड: ‘ऑन द स्पॉट’ प्लान

हमारे देश में लोग 3 महीने बाद का प्लान तो छोड़िए, आज शाम को क्या करना है, यह भी चाय की चुस्की के साथ तय करते हैं। हॉलीवुड की फिल्में मार्वल ब्रांड के भरोसे महीनों पहले बिक जाती हैं, लेकिन बॉलीवुड में दर्शक पहले गाना, ट्रेलर और ‘पब्लिक रिव्यू’ देखते हैं। जब तक माहौल गरम न हो, भारतीय जनता अपनी जेब ढीली नहीं करती!

4. फ्लेक्सिबल टिकट प्राइसिंग का गणित

अगर 100 दिन पहले टिकट बिकने लगेंगी, तो थिएटर्स फिल्मों के क्रेज के हिसाब से टिकट के दाम (Dynamic Pricing) घटा-बढ़ा नहीं पाएंगे। वीकेंड पर टिकट 500 की करनी है या 200 की, यह फैसला आखिरी वक्त के बज पर टिका होता है।

तो दोस्तों, अगली बार जब आप किसी बड़ी फिल्म की टिकट बुक करने के लिए ऐप पर बार-बार रिफ्रेश का बटन दबाएं, तो गुस्सा मत होइए। समझ जाइए कि यह हमारे देसी सिनेमा का अपना अलग ही मसालेदार ड्रामा है!


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कागा जी