दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक बार फिर लोकतंत्र का महान ‘सर्कस’ सजा। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ताओं और दूरदर्शी विश्लेषकों की मानें तो मैदान में ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि बंगाल की खाड़ी में सुनामी आ जाए! हम ‘काक-वाणी’ के कौवे ऊपर आसमान से नीचे का विहंगम नजारा देख रहे थे। सच कहें तो नीचे बिखरी लाल और नीली खाली कुर्सियां धूप में इतनी तेज चमक रही थीं कि हमें अपनी आंखें मींचनी पड़ीं। पर खैर, राजनीति में नजरों को नहीं, दावों को तरजीह दी जाती है!
खाली कुर्सियों का ‘महा-समुद्र’ और कांग्रेसी गणित
कांग्रेस के नेताओं ने मंच से पूरे जोर-
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