जंगल का पुराना राजा और नन्ही दोस्त
विशाल नंदनवन में ऐरावत नाम का एक अत्यंत दयालु हाथी रहता था। जवानी के दिनों में ऐरावत जंगल का सबसे शक्तिशाली जीव था, लेकिन समय के साथ उसकी आँखों की रोशनी धुंधली हो गई थी और शरीर कमजोर पड़ चुका था। उसी जंगल में ‘चिपकी’ नाम की एक नन्हीं गिलहरी भी रहती थी। वर्षों पहले ऐरावत ने चिपकी को एक भीषण तूफान में बहने से बचाया था। उस दिन से दोनों के बीच एक अटूट और अनोखा रिश्ता बन गया था। चिपकी रोज ऐरावत के लिए मीठे फल लाती और ऐरावत उसे अपनी सूंड पर बिठाकर हवा में झुलाता था।
मुसीबत की घड़ी और अपनों की बेवफाई
एक बार भीषण गर्मी के कारण जंगल की नदियाँ सूख गईं। पानी की तलाश में भटकते हुए ऐरावत एक गहरे और दलदली गड्ढे में जा गिरा। भारी शरीर और बुढ़ापे के कारण वह जितना निकलने की कोशिश करता, उतना ही दलदल में धंसता जाता। लाचार होकर ऐरावत ने मदद के लिए जोर-जोर से चीखना शुरू किया। उसकी आवाज सुनकर जंगल के कई ताकतवर जानवर वहाँ पहुंचे। लेकिन ऐरावत की दयनीय हालत देखकर सियार, चीते और बंदरों ने उसकी मदद करने के बजाय उसका मजाक उड़ाया। सबने कहा कि जो अब किसी काम का नहीं रहा, उसकी मदद करके समय क्यों बर्बाद करना?
नन्हीं गिलहरी का अटूट विश्वास
जब सब जानवर ऐरावत को मरता हुआ छोड़कर चले गए, तब ऐरावत ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपनी मृत्यु का इंतजार करने लगा। तभी उसे एक जानी-पहचानी चीं-चीं की आवाज सुनाई दी। “हिम्मत मत हारो ऐरावत! मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगी।” वह चिपकी थी। ऐरावत ने निराशा में कहा, “प्यारी चिपकी, तुम तो खुद एक छोटी सी जीव हो। इस विशाल दलदल से मुझे कैसे निकालोगी? तुम यहाँ से चली जाओ।” चिपकी ने अपने नन्हे हाथों को समेटा और बोली, “सच्ची मित्रता और इरादों के आगे हर मुसीबत छोटी होती है।”
एकता और बुद्धि का महा-चमत्कार
चिपकी तुरंत भागकर जंगल के सभी छोटे और उपेक्षित जीवों के पास गई—चींटियाँ, चूहे, कछुए और छोटे पक्षी। चिपकी ने सबको याद दिलाया कि कैसे ऐरावत ने अपने जीवन में हमेशा छोटे जीवों की रक्षा की थी। उसकी भावुक बातें सुनकर सैकड़ों चूहे और चींटियाँ मदद के लिए तैयार हो गए। चूहों ने गड्ढे की दलदली दीवार के किनारे की सूखी मिट्टी को काटना शुरू किया और एक लंबा ढलान बना दिया। वहीं, पक्षियों ने अपनी चोंच से छोटे-छोटे पत्थर और सूखी लकड़ियाँ लाकर दलदल के रास्ते पर बिछा दिए। पूरी रात छोटे जीवों ने बिना रुके मेहनत की।
जीवन की नई सुबह और सच्ची सीख
सूरज की पहली किरण के साथ ही दलदल के बाहर एक मजबूत रास्ता तैयार हो चुका था। छोटे जीवों के इस असीम प्रेम को देखकर ऐरावत का मन भर आया। उसके अंदर जीने की एक नई उम्मीद जग गई। ऐरावत ने अपनी पूरी बची हुई ताकत जुटाई और चूहों द्वारा बनाए गए रास्ते पर कदम रखते हुए दलदल से बाहर निकल आया। ऐरावत की आँखों से आँसू छलक पड़े। उसने नन्हीं चिपकी को अपनी सूंड से उठाकर अपने माथे से लगा लिया।
कहानी की सीख (Moral):
पंचतंत्र की यह कहानी हमें सिखाती है कि किसी का आकार या शारीरिक ताकत उसकी असली क्षमता का पैमाना नहीं होती। संकट के समय दिखाया गया निस्वार्थ प्रेम, बुद्धि और एकता बड़े से बड़े संकट को टाल सकती है। सच्चा मित्र वही है जो कठिन से कठिन परिस्थिति में भी आपका साथ न छोड़े।