Title: आत्माओं को जोड़ने वाली ये धर्मग्रन्थ
धर्म एक ऐसी संस्कृति है जो हमें सजीव रहने के मूल नियम सिखाती है। ये नियम सिर्फ हमारी आत्मा के लिए होते हैं जिनसे हम यह अहसास कर पाते हैं कि हमारा व्यक्तिगत महत्त्व और कर्म विश्व कल्याण में कितना महत्वपूर्ण होता है। आज हम सब बहुत भागदौड़ में हैं और हमारी आत्मा के लिए उसे समय देने में लगभग कोई भी समय नहीं होता। इसलिए आज हम आपके सामने एक धर्मग्रन्थ लेकर आए हैं जो आपकी आत्मा को जोड़ेगा।
भागवत गीता
भागवत गीता एक धर्मग्रन्थ है जो अर्जुन और कृष्ण के संवाद के रूप में लिखा गया है। इसमें मानव जीवन की प्रत्येक पहलू की बताई गई है। ये भगवद गीता में दिए गए कुछ श्लोक हैं जो बताते हैं कि हम कैसे अपनी आत्मा से जुड़ सकते हैं –
श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।
ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति।। (भगवद गीता ४.३३)
श्लोक में बताया गया है कि जो मनुष्य सच्ची श्रद्धा लेकर इस धर्ममार्ग पर चलते हैं और अपने इंद्रियों को संयम में लाने में सक्षम होते हैं, उन्हें प्रभु का ज्ञान प्राप्त होता है जिससे वो निरंतर विकास करते हुए उंचाईयों को छूते हैं।
श्रीमद भगवद गीता एक ऐसा धर्म ग्रंथ है जो हर व्यक्ति तक पहुंचाना चाहिए। इस ग्रंथ में उल्लिखित नियमों का पालन करने से व्यक्ति अत्यंत सुखी और शांत होता है जो उसे आत्मा से जोड़ता है।
रामचरितमानस
एक और ऐसा धर्मग्रन्थ है जो हमें अपनी आत्मा को जोड़ने के लिए उपयोगी है वह हांमें रामचरितमानस है। ये कविता रचना तुलसीदास जी ने की थी। इसमें समाज के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू बताए गए हैं जो हमारे जीवन को उत्तम बनाने में मदद करते हैं।
रामचरितमानस में हमें शांति के लिए कुछ श्लोक मिलते हैं जो हमारी आत्मा को शांत करने में सहायता करते हैं।
जाकी प्रतिपाल विधिज नाथा।
हृदय बसहु सुर भूरि जाथा।।
इस श्लोक में आश्रय स्थान। हमारी आत्मा की रक्षा करते हैं। इसके अलावा अन्य श्लोक भी हमारी आत्मा को सुखी और शांत बनाने में मदद करते हैं।
भज गोविन्दं
एक और धर्मग्रन्थ जो हमें हमारी आत्मा को जोड़ने में सहायता करता है वह है भज गोविन्द। इस ग्रंथ में ज्ञान की प्राप्ति और आत्मा से जुड़ने के नियमों को बताया गया है।
शंकर जी ने भज गोविन्द के लिए एक श्लोक रचा था जो हमारी आत्मा को संसार से मुक्त करने में मदद करता है।
भज गोविंदम् भज गोविंदम्
गोविंदम् भज मूढमते |
सम्प्राप्ते सन्निहिते काले
नहि नहि रक्षति डुकृंकरणे ||
ये श्लोक हमें इस बात का अहसास कराते हैं कि हमारे जीवन में क्या महत्त्वपूर्ण है और किस बात का महत्व है। हमें ये बताया जाता है कि संसार का मोह हमारी आत्मा को आगे बढ़ने से रोकता है।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब
श्री गुरु ग्रंथ साहिब एक धर्मग्रन्थ है जो सिख धर्म के अनुयायी अधिकतर लोगों द्वारा पढ़ा जाता है। इस ग्रंथ में समाज के जीवन से जुड़े सभी पहलू बहुत अच्छे तरीके से बताए गए हैं।
सिख धर्म में आत्मा की जगह वाहे गुरु को दी जाती है इसलिए इस ग्रंथ में आपको आत्मा से जुड़े नियमों के बारे में बताया जाता है।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब में कुछ श्लोक हैं जो हमारी आत्मा को समझाते हैं कि कैसे हम आत्मा से जुड़े रह सकते हैं –
आतम विच आतम चलाई रहा ਆपे आपਾ ਨु वीसਰੈ ਨਾਹੀ ॥
तू तू करता करता रहे मुझ में मैं मैं करता रहा।
हरि को भावो निर्बाण पावो ਕलि कलेस तन दुख भंजन किरपा निधान तर नाम वरन जापो।।
ये श्लोक हमें बताते हैं कि हमारी आत्मा हमेशा हमारे साथ होती है और हमेशा हमें संसार से जुड़े रहना चाहिए।
सभी जीवों में उपर्युक्त धर्मग्रन्थों में आत्मा से जुड़े नियमों के बारे में बताया गया है। आज कल की भागदौड़ वाली ज़िंदगी में हमें ये नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है ताकि हम अपनी आत्मा से जुड़ सकें। हमारी आत्मा हमारी सभी जिज्ञासाओं का सटीक जवाब है, जिसे हम हमेशा हमारे साथ रखते हैं। इसीलिए हमे हमारे आत्मा के परे देखने के लिए दृष्टि सृष्टि से ऊपर तथा अंतरात्मा से हमेशा जुड़े रहना चाहिए।