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अधूरी ख्वाहिश

Title: अधूरी ख्वाहिश

रेखा एक ऐसी महिला थी जो जीवन में सफलता के दरवाजे नहीं खोल सकी। उसका सपना एक खुशहाल घर था, जहां उसकी परिवार की सभी आवश्यकताओं की खुशी से पूर्ति होती हो। रेखा का पति एक सरकारी अधिकारी था जो नौकरी में लगे रहते थे और उनकी सारी जरूरतों की देखभाल करते थे। पर रेखा का अंतर बिसरा नहीं जा सकता था, वह चाहती थी जिसे वह अपने जीवन में सच करने में सक्षम होती।

एक दिन रेखा ने अपने पति से एक बात कही। “मुझे संगीत सीखना है।” उन्होंने सबसे कमरे में अपने पास रखे एक गिटार पर उंगलियां चलाई और एक ट्यून बजाया। रैना जाती जाती हल्की हल्की बरसती थी लेकिन रेखा ने छुपाने के बजाय अपनी ख्वाहिशों को सामने लाने का फैसला किया। बस उसके मन में संगीत ही साठ रहता था, जिसे उसने बरबाद कर दिया था। लेकिन अब वह अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए तैयार थी।

पर वह भी जानती थी कि यह संभव नहीं है जब वह अपने पति के घर में ही रहती है, जिसमें संगीत न केवल अजान पन था बल्कि सन्नाटों का सामना भी करना पड़ता था। कुछ समय तक संगीत का निष्ठा प्रतिबध्दता मतलब अपनी ही जिंदगी में ब्रेक लगा देना था। चुनौती बहुत मुश्किल लग रही थी।

फिर एक दिन उसने अपनी एक दोस्त से बात की जिसने किसी संगीत संगठन के बारे में बताया जो जमीन पर भी विधार्थियों के लिए बिना किसी साधनों या पैसे के संगीत सिखाते हैं। इससे रेखा का मन मोती बांध हो गया। वह बता नहीं सकती कि उसने कैसे अपनी रचनात्मकता को सीमाबद्धीकृत किया था। जब एक संगीत संगठन द्वारा वह संगीत सीख सकती थी जहां चारों तरफ से समर्थकों ने उसे हमेशा सहारा दिया।

रेखा अपने हाथ में हार लेकर संगीत संगठन के दरवाजे पर प्रवेश किया। वहाँ उसने एक आश्चर्यजनक दुनिया देखी। लोग खुश और आदरापूर्ण थे, और उन्होंने रेखा का स्वागत किया। वहाँ संगीत के सभी रंगों से भरा माहौल था। संगीत नास्तिक होने के नाते भी लोग आवाज के शोर में डूबे रहते थे।

माहौल में डूबते हुए रेखा को लगने लगा कि उसने शायद अंततः अपनी एक ख्वाहिश को साकार कर लिया है। उसने बचपन से संगीत से प्यार किया था और उस दिन से जब उसने संगीत के साथ अपना समय बिताया तब से वहाँ उसका जीवन मुख्यतः संगीत के नौषेज में हुआ था।

रेखा ने एक बार और मन में वही वही इच्छा भरी; अधूरी ख्वाहिश में कब्जा कर लिया। संगीत नहीं था जो सिर्फ उसके नफसत में होता था। वहाँ उसके साथ – लोग भी थे, जो संगीत में उससे बढ़कर शामिल थे। जिस प्रकार उन्होंने उसे अपना हमदर्द स्वीकार किया था, उसकी ख्वाहिश को समझा और उसे उसके नफसत में शामिल किया, उससे अधिक शान्तिप्रिय एवं स्नेहवान मान से मिल सकता था।

रेखा अपने हार को धारण कर संगीत संगठन से घर जा रही थी, उन लोगों ने उसे अपनी इच्छाओं को साकार करने की प्रेरणा दी। मायूस और धमकी में होने के बजाय उसे अपनी इच्छाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्थायी साथ होने की सलाह दी।

रेखा सहज नहीं थी। अपनी संगीत सीखने की इच्छा से अधिक एक गम की तरह थी। लेकिन इस संगीत संगठन के साथ उसे एक अनुभव मिला था जो उसके सपनों को सच करने की इच्छा को प्रेरित करता था। रेखा अपनी कोशिशों को और एक मुकाम तक पहुंचाने के लिए तैयार थी।

संगीत संगठन और संगीत सीखने का अनुभव उसे उसके जीवन को समृद्ध बनाने वाली एक आईडिया दिया। उसे नहीं पता था कि संगीत उसकी अंतिम ख्वाहिश होगी, लेकिन उसे अब यकीन हो जाता था कि यह अधूरी ख्वाहिश नहीं रहेगी। रेखा ने संगीत के साथ नई खुशियाँ पाईं, संघटित रहने, एक साथ किया। फिर रेखा समझती हुई थी कि संगीत ने उसकी जिंदगी को एक नया रंग और एक नई उमंग से भर दिया था। जो उसे जीवित एवं समृद्ध बनाए रखता था।

कागा जी

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