Title: फूलों का सफर
एक सुन्दर सी महिला जिसका नाम अभिनेत्री रानी था जंगल में बहुत ज्यादा उलझन में थी। वह उस समय एक बड़े फूलों के पौधे के पास वहीं खड़ी थी। उसे गहरा आराम मिल रहा था। लेकिन उसे फूलों के कुछ पतले पते यहां तक करीब आते दिखाई दिए जो उसे तबीयत से उलझान में डालते थे। उसने उन फूलों को ध्यान से देखा तो उसने देखा कि वह फूल असंभव है। खुशबू उससे दूर से आई।
उसने इसे एक फूलों के पेड़ की छाया में रख दिया। उसने उस फूल को ध्यान से देखा और सोचा कि क्या अगली बार भी उसे इसी फुर्सत में इसके पास उलझन में सो जाना चाहिए?
रानी ne कई दिनों तक उस फूल को ध्यान से देखा। बाद में, उसने कुछ शांति पास की। वह ऋणी थी तथा सभी विवेक और समझ है। अगले दिन, वह नहीं पास उस फूल के पास गई। भले ही उसके मन में कुछ गड़बड़ी न होगी लेकिन इस बात की शांति वह उस फूल से प्राप्त कर चुकी थी।
पर मन में ये सवाल जरूर उठता था कि वह उस फूल के बारे में कुछ भी नहीं जानती थी। क्या यह फूल असंभव था। उस फूलों के बारे में रानी ने अधिक विस्तार से जानने की कोशिश नहीं की।
दिनों बीत गए तथा रानी जिस विशेष स्थान से जोड़ी जा रही थी वहां फूलों की बेल्ट पेड़ों से ढली जा रही थी।अचानक, रानी ne एक ताजी शीशी में पानी देखा जो फूलों के खिलने को बढ़ावा देती है। उसने उस शीशे को अपने साथ ले लिया।
प्रभावशाली नामक किसी फूल के पेड़ के पास पहुँचकर, रानी ने उस शीशे में कुछ पानी डाला तथा इसे फूल पर छिड़क दिया। परिणाम अद्भुत था। रंग-बिरंगे फूल छिद्रभंग हो गए। यह फूल उस फूल से था जिसे रानी ने बीते कुछ दिनों से ध्यान से देख रखा था।
रानी को गम्भीर समस्या का समाधान पता था – कभी-कभी आपके आस पास ही हमारे जिंदगी के उत्तर होते हैं। आपको बस उन्हें संवेदनशील और विवेकी नज़र से देखना है।
फूल की येदास्त
रानी के जीवन की एक और घटना उतनी प्रभावशाली नहीं थी लेकिन अब तक वह इसे याद करती है। रानी ne महसूस किया कि एक नया अनुभव हो रहा है।
एक बार, उसकी एक फिल्म का प्रदर्शन हो रहा था। वह अपने स्टेज पर थी, सारा जमाना उसको देख रहा था। आधिकारिक कड़ी के मुताबिक, प्रदर्शन करने से पहले वह कुछ मांगों का आह्वान करती है।
मैं सबसे उस स्थान से ज़्यादा जिम्मेदार होता हूँ जहां मैं फिल्म का निर्माता हूं और मुझे हमेशा लगता है कि मुझे प्रदर्शनों के समय जितना संभव हो, खुशियां फैलाना चाहिए। यहां तक कि, मेरे विभिन्न प्रदर्शनों में शामिल होने वालों को ठंडी खुशबू, चॉकलेट, चेरी पान के कागज आदि देते हैं, ताकि उन्हें घटने वाला सफर भी याद रहे।
इस बार, रानी ने फूल को स्टेज पर खाली जगह में विस्तार किया और बताया कि एक खुशबूदार मैचस्टिक के साथ उस फूल को ग्राहकों को देना हैं। रानी ने सोचा कि इससे फूल की यादाश्त लोगों को रहेगी और उसको कुछ समय बाद वे रोशनी में ताजगी के साथ देखेंगे। जैसे ही फूल स्टेज पर खुला, लोग उसे देख कर चहेटे रहे और वे उसे महसूस करने लगे कि वह कुछ खास है।
इसके बाद, रानी को समझ में आ गया कि यह फूल मन को असंतुलित कर रहा था। उसका सौंदर्यरूप होने के बावजूद यह एक तनावपूर्ण फूल था। रानी को लगता है कि इसकी कोमलता ने लोगों को मोह लिया था। वह सभी व्यक्ति को समझाती हैं कि वह फूल सफर के दौरान बहुत समय से ऊपर, सूखे और घनिष्ठ जंगल में ऊपर तक बढ़ने का संघर्ष कर चुकी थी।
यह सब वैज्ञानिक सिद्धांतों से ऊपर था। रानी ज्यादातर फूलों के पेड़ों के आस-पास अध्ययन नहीं करती थी तथा इसके बाद भी उसने उन पेड़ों के आस-पास से गुजरने में कुछ क्षणों की विलम्ब नहीं की। उसे लगता है कि यह फूल मन को छलनी किए बिना छेड़ा जा रहा था ताकि सभी लोग उससे परिचित हो सकें।
यह एक अनोखा सफर था। इसमें एक फूल का संग्रह हुआ था जो रानी के आस-पास सभी चीजों को बदल देता था।
समाप्ति
फूलों का सफर और फूल की यादास्त दो महत्वपूर्ण कहानियों हैं जो हमें याद दिलाती हैं कि जीवन की खोज में कितने रोमांचक, आनंदमय और मजेदार सुख-दुख होते हैं। हमें कुछ अच्छे से याद रखना चाहिए कि जीवन के संग्रह कपड़ों या औजारों में नहीं होते हैं। जीवन रोमांचक, आनंदमय और सामाजिक अनुभवों से लक्ष्य की और चलता है।