एक विदर्भ का बालक | A boy from Vidarbha
विदर्भ क्षेत्र में एक गांव में रहने वाला लड़का था जिसका नाम हरषद था। हरषद बचपन से ही बहुत होशियार और समझदार था। उसके माता-पिता उससे बहुत प्रेम करते थे क्योंकि उन्होंने उसे समझाया था कि वे छोटे होते हुए भी दिल से अच्छे हों।
हरषद को अपने दोस्तों के साथ खेलना पसंद था लेकिन उसे बार-बार याद दिलाया जाता था कि उसे अध्ययन पर ध्यान देना चाहिए। एक दिन उसकी दृष्टि एक चट्टान पर पड़ी जहां उसे घोड़ों पर बैठते देखा गया। हरषद तुरंत उस चट्टान पर जाकर घोड़ों की पूछ से हटकर बैठ गया। इसे देखकर उसके दोस्तों ने उसे चीराघट्टा बताया लेकिन हरषद को उनके मजाक में कोई दिक्कत नहीं थी।
हरषद अपने अध्ययन में भी बहुत ध्यान देने लगा और उसने अपने भविष्य की योजना बनाना शुरू कर दी। वह स्कूल के बाहर आते-जाते लोगों के साथ बातचीत करना शुरू कर दिया ताकि उसकी सामाजिक योग्यता बढ़ सके।
एक दिन, उसके गांव में एक विद्युत लाइन लगाने के लिए कंपनी के कर्मचारी आए थे। हरषद उन्हें अंग्रेजी में संबोधित करके उनसे बात करने लगा। वे हमेशा सोचते थे कि उन्हें बात करने से दूर रहना चाहिए क्योंकि वे इसके लायक नहीं होते। लेकिन हरषद को इस रोजगार के लिए आवेदन करने की सलाह दी गई थी जिसे वह न सिर्फ देखा बल्कि उसने उस दिन से ही लक्ष्य बना लिया था।
उस दिन के बाद, हरषद ने अपने अध्ययन और अन्य कामों में अधिक समय दिया और उसने सभी को देख कर इस दुनिया में एक सफल व्यक्ति का सपना देखना शुरू किया। वह अंग्रेजी और कम्प्यूटर की पढ़ाई शुरू कर दी और उसने अपनी योग्यता में सुधार कर अधिक सफलता पाई।
हरषद की जिंदगी बदल गई थी। दोस्त उसे उसकी सफलता के लिए बधाई देते रहते थे। उनमें एक दिन उसे एक स्कूल में अंग्रेजी सीखाने के लिए नौकरी प्रदान की गई। वह बहुत खुश हुआ और अपनी नौकरी में इरादे से दिल लगाकर काम करने लगा।
हरषद ने सबको दिखाने का एक सपना देखा था। वह बच्चों को अंग्रेजी सीखाकर उन्हें व्यापक ज्ञान देना चाहता था। इस प्रयास में, वह स्कूल के बाहर भी जाता और गांव के अन्य लोगों के साथ बातचीत करता था।
Hindi Title: एक विदर्भ का बालक
English Title: A boy from Vidarbha