“शिवानी की अंतिम इच्छा”
शिवानी एक सुंदर लड़की थी जो अपने जीवन में बहुत सारी परेशानियों से गुजर गई थी। वह एक बैंक में कार्य करती थी और उसका गहना संग्रह बहुत लोकप्रिय था। उसके सारे संग्रह को उसने अपने आत्महत्या नोट में दान करने का फैसला किया था।
शिवानी कहीं न कहीं बैंगलोर में रहती थी। वह एक समाजसेवी संगठन में भी शामिल थी और अक्सर गरीब लोगों की मदद करती थी। लेकिन उसका जीवन कुछ ऐसा था कि उसकी समस्याएं और तनाव उसे मुश्किल जीवन में ले जा रहे थे।
शिवानी की जिंदगी में कुछ खुशियां थीं जो उसके साथ उसकी मदद करती थीं। उसके भाई ने एक मोटरसाइकिल खरीदी थी जो शिवानी को जाने-अनजाने में बड़ी सहायता पहुंचाती थी। शिवानी इससे घबराती थी, लेकिन उसके भाई उसे समझाते रहते थे कि “तुम्हें कुछ भी हो जाए, मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूंगा।”
शिवानी के जीवन में बहुत सारे टूटे रिश्ते भी थे। उसकी मां का स्कूल शिवानी करवाना चाहती थी। लेकिन शिवानी उनसे नाराज थी। उसने सोचा था कि वह पढ़ाई ही करेगी जिसे वह करना चाहती है। उसने एक जॉब पाने के बाद अपनी स्वतंत्रता से अपने जीवन को जीने का फैसला किया।
एक दिन शिवानी की स्थिति बिगड़ गई। वह एक दिन बैंक में अपने काम कर रही थी जब एक गाड़ी उसके ऊपर से गुजर गई और उसे कुछ नहीं हुआ। लेकिन उसके आगे के कामरे में एक लड़की थी जो गाड़ी के गिरने से घायल हो गई थी।
उसकी स्थायीता सुस्त थी। शिवानी जोखिम में कूद गई। उसने जब जांच की तो उसे पता चला कि यह लड़की दो महीने से घर से नहीं गई थी। वह एक बीमारी से ग्रस्त हो गई थी और अपनी स्थिति सुधारने के लिए उसका कोई भी सहारा नहीं था।
शिवानी की एक दिन की जान उसने उस लड़की के लिए खुराक पर होने वाली खर्चे का खुद अपने पैसे से भुगतान कर दिया था। उसके साहस की प्रशंसा मुझे बताने के लिए शब्द नहीं हैं।
शिवानी उस लड़की को अस्पताल में देखती रही और अंत में उसे एक सुरक्षित जगह पर ले जाकर छोड़ दिया।
कुछ दिनों बाद, शिवानी के हाथ कंपने लगे और उससे उसकी प्यारी मोटरसाइकिल बाहर गिर गई। वह कुछ गंभीर समस्या से गुजर रही थी और शिवानी को इसे दूर से देखकर कफी खीच लेता था।
अब शिवानी जीने के लिए मजबूर नहीं थी। उसकी इच्छा थी कि वह अपनी गरीबी और मुश्किल जिंदगी से छुटकारा पाए। उसने एक दिन एक आत्महत्या नोट लिखा और उसे उसकी जेब में रख दिया। उस दिन से पहले उसने अपने जीवन का सबसे प्यारा वस्तु (मोटरसाइकिल) दूसरों की मदद के लिए बेच दिया था।
अब शिवानी को अपनी नौकरी और अपनी संपत्ति से विदाई लेने का समय आ गया था। वह उसी आत्महत्या नोट के साथ उत्तर प्रदेश के अनूपशहर में जाना चाहती थी जहाँ उसका पूर्वज रहते थे।
शिवानी ने एक ट्रेन में सफर करते हुए कुछ राशि संग्रह की थी जो वह अस्पताल में अपनी पंचायती दुकान में डालती थी।
ट्रेन में जारी कुछ बदलते कुछ रुझानों में, सभी यात्रियों ने उस छाते के बारे में सोचते हुए उसे एक छोटा सा गुफा देकर उसके भोजन की जांच करने के लिए चले गए।
जब वे वापस आए तो उन्हें अब उस छाते के निचले भाग में एक लड़की बैठी दिखाई दी। उसने दिखते सुख-दुःख की कहानी सुनाई। उस लड़की का नाम उसने नहीं बताया था लेकिन उसने उसे पहले खुश और फिर उदास बताया था कि वह अपनी नौकरी और अपनी दुकान छोड़ देना चाहती है। उसे हमेशा से छोटे गांवों में खेती करके जीना चाहती थी।
“मुझे लगता है वह एक अलग सहारा में रहती है।”
वह शिवानी के साथ बातें करती रही और उसने अपनी ज़िन्दगी के उलझनों के बारे में भी बताया।
“मुझे मांगलिक दोष है जो मुझे अगले जन्म में गरीबी में डाल सकता है। मैं इसे कैसे बचा सकती हूं?”
शिवानी ने उससे पूछा कि उसकी आखिरी इच्छा क्या है। वह बोली, “मैं एक संपन्न और समृद्ध जीवन जीना चाहती हूं जो किसी प्रकार से मुझे बख्शिश मिलता है।”
शिवानी ने बहुत ध्यान से सुना था। उसने उसके साथ घंटों बातें कीं और उसके लिए इंसान तो कुछ नहीं कर सकता था। लेकिन वह उसे यह बताने में समर्थ थी कि संघर्ष के बाद हमेशा साफलता मिलती है।
जैसे ही ट्रेन अनूपशहर स्टेशन पर रुकी, शिवानी ने उस लड़की के साथ बाहर जाने का फैसला किया। वह उससे अकेले रहने की आशा नहीं रखती थी। शिवानी ने उसे बाहर देखा और प्रभात ज्ञापक के बजाए उससे मध्याह्न का ट्रेन लेने की सलाह दी।
शिवानी ने उसे इसकी संभवना दी थी कि उसे अपनी स्वतंत्रता का लुत्फ लेना चाहिए। उसने उसे बताया कि वह अपनी इच्छा पूरी कर सकती है।
शिवानी ने उस लड़की के साथ ट्रेन में बैठकर उसे कुछ बताए। उसने उसे बताया कि सभी संघर्षों के बाद अंत में सरलता होती है। उसने उसे अपने खुद के जीवन की एक कहानी बताई।
हमेशा से गरीब होने के बाद, शिवानी ने अपनी ज़िन्दगी की अगली गाड़ी खरीदने के लिए कैश चाहिए थे। उसने धुंधकर आखिरकार एक दुकान पर हाथ बांध दिया।
वह ध्यान देने वाली नहीं थी, इसलिए उसे पता नहीं चला कि उस दुकान का मालिक अपनी पत्न